नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए राज्य में एक ‘एम्पावर्ड कमेटी’ यानी अधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। यह समिति राज्य में CAA के तहत नागरिकता के लिए आए आवेदनों की जांच करेगी और उन पर अंतिम फैसला लेगी।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और इसे सीधे तौर पर मतुआ समुदाय को साधने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र ने मार्च 2024 में ही CAA के नियमों की घोषणा की थी, लेकिन राज्य स्तर पर इसे लागू करने के लिए प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता थी, जो इस समिति के गठन के साथ अब पूरी हो गई है।
समिति की संरचना और प्रमुख सदस्य
गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नीतीश कुमार व्यास द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस समिति का गठन नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 6B और नागरिकता नियम, 2009 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
समिति की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के जनगणना संचालन निदेशालय के उप महारजिस्ट्रार करेंगे। इसके अलावा, समिति में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे:
- सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो (SIB) के उप सचिव रैंक का एक अधिकारी।
- संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी (FRRO) का एक नामित प्रतिनिधि।
- पश्चिम बंगाल के राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी (अवर सचिव रैंक से नीचे नहीं)।
- डाक विभाग के पोस्टमास्टर जनरल या उनके द्वारा नामित उप सचिव स्तर का एक अधिकारी।
इसके अतिरिक्त, राज्य के गृह विभाग के प्रधान सचिव या अतिरिक्त मुख्य सचिव और संबंधित मंडल रेल प्रबंधक (DRM) के एक प्रतिनिधि को बैठक में आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकेगा।
फैसले के राजनीतिक मायने
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार शुरू से ही CAA का विरोध करती रही है और इसे ‘भेदभावपूर्ण’ कानून बताती रही है। ऐसे में केंद्र का यह कदम राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार चुनाव से पहले मतुआ समुदाय द्वारा जमा किए गए नागरिकता आवेदनों को मंजूरी देना चाहती है।
CAA के तहत नागरिकता मिलने में हो रही देरी से एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। यह भी आरोप लग रहे थे कि नागरिकता न मिलने के कारण कई लोगों के नाम मतदाता सूची से भी कट सकते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मतुआ समुदाय के लोग शामिल हैं। इस फैसले का संकेत हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी दिया था।
“उन्हें अपने वोट कम होते दिख रहे हैं, क्योंकि मतुआ लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने अब तक उन्हें यह (नागरिकता) क्यों नहीं दिया? वे यह सब जल्दबाजी में कर रहे हैं क्योंकि उनके पैरों तले जमीन खिसक रही है। यह नहीं कहा जा सकता कि अगर यह कमेटी बनती है तो मतुआ लोगों को नागरिकता मिल जाएगी।”- ममता बाला ठाकुर, टीएमसी नेता
इस नोटिफिकेशन के साथ, पश्चिम बंगाल में CAA को लागू करने का प्रशासनिक ढांचा अब तैयार है। यह अधिकार प्राप्त समिति ही आवेदनों की जांच करेगी और यह तय करेगी कि किसे नागरिकता दी जानी है और किसे नहीं।





