नई दिल्ली: अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए एक बड़े घटनाक्रम के बाद भारत सरकार ने स्थिति पर करीब से नजर बनाए रखी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले के बाद राष्ट्रपति प्रशासन ने सभी आयातित वस्तुओं पर 10 प्रतिशत का अस्थायी अधिभार लगाने की घोषणा की है, जिसके भारतीय व्यापार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का वाणिज्य मंत्रालय गहनता से अध्ययन कर रहा है।
शनिवार को जारी एक बयान में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि वह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और उसके बाद हुई घोषणाओं से पूरी तरह अवगत है। बयान में कहा गया, “अमेरिकी प्रशासन द्वारा घोषित नए कदमों के असर का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि भारतीय व्यापार और उद्योग पर पड़ने वाले प्रभावों का सटीक आकलन किया जा सके।”
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से एक फैसला सुनाया। इस फैसले में अदालत ने माना कि राष्ट्रपति द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए व्यापक टैरिफ उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर और कानूनी रूप से अवैध थे। इस निर्णय को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
10% अस्थायी आयात अधिभार की घोषणा
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के ठीक बाद, 20 फरवरी को राष्ट्रपति की ओर से एक नई घोषणा की गई। इसके मुताबिक, 24 फरवरी 2026 से 150 दिनों की अवधि के लिए अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर 10 प्रतिशत का अस्थायी एड-वेलोरम (मूल्य आधारित) आयात अधिभार लगाया जाएगा। यह शुल्क मौजूदा मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) या सामान्य आयात शुल्क के अतिरिक्त होगा।
इससे पहले भारत पर लगे टैरिफ में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया था। अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया था, जिसके बाद रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी जोड़ा गया, जिससे कुल टैरिफ 50% हो गया था। हालांकि, बाद में दंडात्मक शुल्क हटा दिया गया था और 25% टैरिफ लागू था। अब नई घोषणा के बाद, 24 फरवरी 2026 से भारतीय वस्तुओं पर प्रभावी टैरिफ 10 प्रतिशत रह जाएगा।
व्यापार समझौते पर नहीं पड़ेगा असर
इन घटनाक्रमों के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ कर दिया कि भारत के साथ प्रस्तावित व्यापार समझौते की प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा और वार्ता पहले की तरह जारी रहेगी। इसी सिलसिले में, द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण के कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल 23 फरवरी 2026 से वॉशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक करेगा।
गौरतलब है कि अमेरिका 2021-25 के दौरान भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार साझेदार रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 186 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।





