रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। फरवरी में नियमों का उल्लंघन करने वाले एक और बैंक पर भारी पेनल्टी लगाई गई है। पब्लिक सेक्टर के यूको बैंक पर 38.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस बैंक ने लॉकर रेंट, क्रेडिट इन्फॉर्मेशन रिपोर्टिंग समेत कई बैंकिंग नियमों का उल्लंघन किया है। आरबीआई ने बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 और क्रेडिट इंफॉर्मेशन कंपनी रेगुलेशन एक्ट 2005 के अलग-अलग प्रावधानों के तहत उठाया है।
बैंक के वित्तीय स्थिति को देखने के लिए आरबीआई ने 31 मार्च 2025 को एक निरीक्षण किया था। इस दौरान दिशा निर्देशों के अनुपालन में खामियों का पता चला। इसके बाद इस सरकारी बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस पर आए जवाब और जमा किए गए प्रस्तुतियों के आधार पर आरोप सही पाए गए। इसके बाद पेनल्टी लगाने का फैसला लिया गया।
बैंक ने तोड़े ये नियम
यूको बैंक ने कुछ सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट पर कोई इंटरेस्ट नहीं दिया था। इसके अलावा क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को क्रेडिट से जुड़े सेल्फ हेल्प ग्रुप मेंबर लेवल का डेटा रिपोर्ट करने में भी विफल रहा। इसके अलावा कुछ ग्राहक द्वारा लॉकर के प्रीमेच्योर सरेंडर के मामले में किए गए एडवांस लॉकर रेंट की प्रपोजल रकम वापस भी नहीं की थी। इन सभी आरोपों की पुष्टि होने के बाद आरबीआई ने पेनल्टी लगाना जरूरी समझा।
ग्राहकों पर असर नहीं पड़ेगा
जब भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया किसी बैंक या कंपनी पर मौद्रिक जुर्माना लगता है, तो इसका असर खाताधारकों पर नहीं पड़ता। इस बात का स्पष्टीकरण आरबीआई ने खुद अपने नोटिफिकेशन में दिया है। जिसके मुताबिक यह कार्रवाई केवल विनियामक कमियों पर आधारित है। इसका मकसद बैंक और ग्राहक के बीच हो रहे किसी भी लेनदेन या एग्रीमेंट की वैलिडिटी पर सवाल उठाना नहीं है।
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