केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में घोषणा की कि राज्य ने चरम गरीबी पूरी तरह खत्म कर दी है। यह उपलब्धि केरल पिरावी दिवस पर हासिल हुई, जो राज्य की स्थापना के 69 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है। विजयन ने इसे 2021 चुनावी वादे की पूर्ति बताया और कहा कि उनकी सरकार के पहले कैबिनेट बैठक में ही यह प्रमुख फैसला लिया गया था।
सर्वेक्षण के जरिए सबसे गरीब परिवारों की पहचान दो महीने बाद शुरू हुई, जिसमें स्थानीय निकाय, कुडुंबश्री कार्यकर्ता और स्वयंसेवक शामिल हुए। केरल इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल एडमिनिस्ट्रेशन (KILA) के मार्गदर्शन में 1,032 स्थानीय निकायों में 64,006 परिवारों (कुल 1,03,099 व्यक्ति) को चरम गरीब चिह्नित किया गया। भोजन, स्वास्थ्य, आवास और आय को मुख्य संकट कारक माना गया, जिसके लिए प्रत्येक परिवार हेतु माइक्रो-प्लान तैयार किए गए। अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं।
4,677 परिवारों को लाइफ मिशन से मिले घर
इस पहल के तहत 4,677 परिवारों को लाइफ मिशन के जरिए घर मिले, जबकि 2,713 परिवारों को जमीन और निर्माण सहायता दी गई। हजारों परिवारों को राशन कार्ड, स्वास्थ्य, शिक्षा सहायता और आजीविका प्रशिक्षण प्रदान किया गया। नीति आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, केरल का बहुआयामी गरीबी दर मात्र 0.48% है, जो राष्ट्रीय औसत 11.28% से काफी कम है।
भूमि सुधार, सामाजिक कल्याण की नीतियां
विजयन ने इसे असाधारण उपलब्धि बताते हुए भूमि सुधार, सामाजिक कल्याण नीतियों, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा पहलों का श्रेय दिया। उन्होंने कहा कि उच्च गरीबी दर वाले अतीत से चरम गरीबी उन्मूलन तक का सफर केरलवासियों की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रमाण है।






