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ट्रंप के टैरिफ से भारत को भारी नुकसान हो रहा, लोग अपनी नौकरियां खो रहे; शशि थरूर क्या बोले

Written by:Mini Pandey
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शशि थरूर ने अमेरिका की नीति को विचित्र और असंतुलित करार देते हुए कहा कि भारत को अब अन्य देशों के साथ व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना होगा।
ट्रंप के टैरिफ से भारत को भारी नुकसान हो रहा, लोग अपनी नौकरियां खो रहे; शशि थरूर क्या बोले

सिंगापुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से भारत को भारी नुकसान हो रहा है और लोग अपनी नौकरियां खो रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अस्थिर प्रकृति की आलोचना करते हुए कहा कि वह पारंपरिक कूटनीतिक व्यवहार का पालन नहीं करते। अमेरिका ने भारत से शिपमेंट पर 50% टैरिफ लगाया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने की सजा के रूप में 25% अतिरिक्त टैरिफ शामिल है। थरूर ने इसे अनुचित बताया, क्योंकि चीन रूस से भारत से अधिक तेल और गैस आयात करता है, फिर भी उस पर ऐसी सख्ती नहीं की गई।

थरूर ने कहा कि इन टैरिफ्स का भारत की अर्थव्यवस्था पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, खासकर सूरत के रत्न और आभूषण उद्योग में, जहां 1.35 लाख लोगों ने अपनी नौकरियां खो दी हैं। इसके अलावा, समुद्री खाद्य और विनिर्माण क्षेत्रों में भी रोजगार के नुकसान की आशंका है। उन्होंने बताया कि 25% आधार टैरिफ और अतिरिक्त 25% सजा के कारण भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करना लगभग असंभव हो गया है। थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को अपने निर्यात बाजारों में विविधता लानी होगी ताकि इस प्रभाव को कम किया जा सके।

राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना

थरूर ने अमेरिका की नीति को विचित्र और असंतुलित करार देते हुए कहा कि भारत को अब अन्य देशों के साथ व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों को मजबूत करना होगा। उन्होंने हाल ही में यूके के साथ हुए व्यापार समझौते का जिक्र किया, जो भारत के निर्यात को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही, उन्होंने भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशों और रूस के साथ स्थिर संबंधों को गर्म करने की संभावना पर भी जोर दिया। थरूर ने सुझाव दिया कि भारत को यूरोपीय देशों के साथ मिलकर एक भारत-यूरोपीय ध्रुव बनाना चाहिए, जो वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली हो।

1000 से अधिक रियल एस्टेट डेवलपर्स

थरूर ने सिंगापुर में सम्मेलन में यह बातें कहीं, जहां 1000 से अधिक रियल एस्टेट डेवलपर्स और सलाहकार शामिल थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को इस संकट से निपटने के लिए अपनी बेल्ट कसनी होगी और वैकल्पिक बाजारों की तलाश करनी होगी। साथ ही, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है, जिसमें आधार टैरिफ में कमी की संभावना है, लेकिन रूस से तेल खरीदने की सजा के रूप में लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ से अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।