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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के सामने रखी एक बड़ी चुनौती, कहा- 5 साल के भीतर स्वदेशी जेट इंजन बनाकर दिखाएं और छठी पीढ़ी की करें तैयारी

Written by:Gaurav Sharma
Published:
बेंगलुरु में DRDO के गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) के दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वदेशी जेट इंजन विकसित करने के लिए 5 साल की समय सीमा तय की है। उन्होंने कहा कि भारत को अब भविष्य की तकनीक पर ध्यान केंद्रित करते हुए छठी पीढ़ी के इंजन पर भी काम शुरू करना होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के सामने रखी एक बड़ी चुनौती, कहा- 5 साल के भीतर स्वदेशी जेट इंजन बनाकर दिखाएं और छठी पीढ़ी की करें तैयारी

बेंगलुरु: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को देश के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के सामने एक बड़ी और स्पष्ट चुनौती रखी है। बेंगलुरु में गैस टरबाइन अनुसंधान प्रतिष्ठान (GTRE) का दौरा करते हुए उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि भारत को 5 साल के भीतर स्वदेशी सैन्य जेट इंजन विकसित करके दिखाना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अब देश को भविष्य की जरूरतों को देखते हुए छठी पीढ़ी के एडवांस इंजन की तकनीक पर भी काम शुरू कर देना चाहिए।

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी सैन्य गैस टरबाइन इंजन से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान यह कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की रणनीतिक जरूरतें और महत्वाकांक्षाएं इस बात की इजाजत नहीं देतीं कि इंजन विकास में दशकों का समय लगे।

’20 साल खत्म, अब सिर्फ 5 साल बचे हैं’

राजनाथ सिंह ने समय की कमी और तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर जोर देते हुए एक अनूठी मिसाल दी। उन्होंने कहा कि अगर किसी इंजन को विकसित करने में 25 साल लगते हैं, तो हमें यह मानकर चलना चाहिए कि हमारे 20 साल पहले ही खत्म हो चुके हैं।

“यह कोई चौंकने वाली या अचरज वाली बात नहीं है, यह एक चुनौती है। हमें इसी 5 साल में वो कर दिखाना है, जो दूसरे देश 20 साल में करते हैं। इसी में हमें अपना बेस्ट देना है।”- राजनाथ सिंह, रक्षा मंत्री

उन्होंने कहा कि सरकार ने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं और एयरो-इंजन के विकास को हमेशा प्राथमिकता पर रखा गया है। अब समय आ गया है कि जो अधूरे प्रयास रह गए थे, उन्हें पूरी ताकत से पूरा किया जाए।

बदलती दुनिया में आत्मनिर्भरता जरूरी

रक्षा मंत्री ने मौजूदा वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “दुनिया की वैश्विक राजनीतिक स्थिति बहुत तेजी से बदल रही है। सप्लाई चेन टूट रही हैं। नए इकोसिस्टम विकसित हो रहे हैं। ऐसे में जिस देश के पास अपनी टेक्नोलॉजी होगी, वही देश सुरक्षित रहेगा और टिक पाएगा।”

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया गया। उन्होंने बताया कि फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देश एयरो-इंजन तकनीक में अग्रणी हैं और उनके साथ साझेदारी से भारत को नई तकनीक सीखने और चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि ब्रिटेन के साथ संयुक्त अध्ययन और फ्रांस के साथ नेशनल एयरो इंजन मिशन के तहत प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।

भविष्य की तकनीक पर काम शुरू करने का निर्देश

राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को भविष्य की ओर देखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हम केवल 5वीं पीढ़ी के इंजन तक सीमित नहीं रह सकते। उन्होंने कहा, “6ठी पीढ़ी की, एडवांस तकनीक का विकास भी, हमें जल्द से जल्द शुरू करना होगा। उस पर रिसर्च, समय की मांग है।” उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई सामग्रियों के बढ़ते प्रयोग में आगे रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में विकसित तकनीक का इस्तेमाल नागरिक उड्डयन, बिजली संयंत्रों और अंतरिक्ष मिशनों में भी हो सकता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

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