नई दिल्ली: होली के त्योहार पर दिल्ली में शराब की बिक्री को लेकर एक बड़ा फैसला लिया गया है, जिसने राजधानी में राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। सरकार ने होली को ‘ड्राई डे’ की सूची से हटा दिया है, जिसका मतलब है कि इस साल त्योहार के दिन शराब की दुकानें और ठेके खुले रहेंगे। पहले होली के दिन दिल्ली में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से पाबंदी रहती थी।
सरकार के इस फैसले पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है और इसे लेकर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जमकर निशाना साधा है। AAP का आरोप है कि यह फैसला बीजेपी के दोहरे चरित्र को उजागर करता है।
‘ये BJP के असली संस्कार हैं’
आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि यह ‘नकली हिंदूवादी’ और ‘फर्जी सनातन’ सरकार का काम है जो होली जैसे पवित्र त्योहार पर शराब की दुकानें खोल रही है।
उन्होंने पुरानी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा, “आपको याद होगा कैसे भाजपा की केंद्र सरकार ने शराब के नाम पर दिल्ली में नाच किया था। हर बात पर झूठ बोलकर आम आदमी पार्टी की सरकार को बदनाम किया था। झूठे मुकदमों में फंसाया गया था।”
“मगर अब दिल्ली में भाजपा की सरकार है और शराब के नाम पर इनके असली संस्कार सबके सामने आ गए हैं। ये ना तो सनातनी हैं, ना देश भक्त। ये सिर्फ सत्ता के भूखे लोगों की अनपढ़ जमात हैं।”- सौरभ भारद्वाज, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष, AAP
भारद्वाज ने आगे आरोप लगाया कि बीजेपी ने छठ महापर्व और रविदास जयंती जैसे मौकों पर भी शराब की दुकानें खोली थीं और अब होली पर भी यही किया जा रहा है।
सीएम रेखा गुप्ता पर साधा निशाना
सौरभ भारद्वाज ने अपने बयान में सीएम रेखा गुप्ता पर भी सीधा हमला किया। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या शराब पीकर जो गुंडई और अश्लीलता सड़कों पर होगी, इससे हमारी बेटियों को बचाना CM रेखा गुप्ता का काम नहीं है?”
उन्होंने आगे कहा, “सिर्फ़ महिला कोटे के नाम पर एक अयोग्य औरत को सत्ता में बिठाया तो जाए मगर उनसे सवाल ना पूछे जाएं?”
आदेश के बाद खुलेंगी दुकानें
दिल्ली सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, होली अब ड्राई डे नहीं होगा। इसके चलते, स्रोत के अनुसार, बुधवार (4 मार्च) को दिल्ली में सभी शराब की दुकानें खुली रहेंगी। इस फैसले ने शराब कारोबारियों को तो राहत दी है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।






