दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को राजधानी में रामलीला के मंचन की तैयारियों को औपचारिक रूप से शुरू किया। उन्होंने दो रामलीलाओं का उद्घाटन पुरानी दिल्ली के लालकिला इलाके और एक का पीतमपुरा में भूमि पूजन करके किया। इन आयोजनों में उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रामलीला केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि समाज में मर्यादा, संयम और सेवा जैसे जीवन मूल्यों का प्रचार करने वाला एक पवित्र माध्यम है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साथ ही यह भी घोषणा की कि दिल्ली सरकार सभी आयोजकों और श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक अनुमति एक ही स्थान—सिंगल-विंडो सिस्टम के माध्यम से उपलब्ध कराएगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया सरल और समय-बचत वाली होगी। उनका कहना था कि रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, और इन्हें भव्यता और पवित्रता के साथ बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
3 जगह के समारोह में शामिल
इन आयोजनों से न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पूरे देश के लाखों श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम के आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलता है। विवरण के अनुसार, मुख्यमंत्री ने जिन तीन रामलीलाओं में भूमि पूजन समारोह में भाग लिया, जिनमें श्री धार्मिक लीला समिति (बगीची माधवदास) – लालकिला में, लव-कुश रामलीला समिति – लालकिला में, श्री राम-लखन धार्मिक सभा – पीतमपुरा जैसी जगह का नाम शामिल है।
राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व
हाल ही में हुई एक खबर में यह भी बताया गया कि दिल्ली सरकार एक सिंगल-विंडो सिस्टम लागू करने जा रही है, ताकि रामलीला आयोजकों को भूमि, पुलिस, अग्निशमन, और अन्य विभागों से अनुमति लेने में आसानी हो। इससे आयोजक अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से बचेंगे और व्यवस्थाएं सुचारू रहेंगी। सरकार ने आयोजन की अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है।
सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व
उन्होंने कहा कि रामलीला धार्मिक आनुष्ठान से अधिक है। यह समाज को मर्यादा, संयम और सेवा जैसे उच्च आदर्शों की शिक्षा देती है। रामलीला की दीक्षा हमें सही मार्ग की ओर प्रेरित करती है और सामाजिक एकता को मजबूत बनाती है। इस बात पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लाखों श्रद्धालुओं को धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का जरिया है।





