कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उस बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा कि मैसुरु के चामुंडी हिल्स, जहां प्रसिद्ध चामुंडेश्वरी मंदिर स्थित है, हिंदुओं की विशेष संपत्ति नहीं है। यह बयान 2025 के मैसुरु दशहरा समारोह का उद्घाटन करने के लिए बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के सरकार के फैसले पर विपक्ष के आलोचना के जवाब में आया था। इस बयान की मैसुरु के शाही परिवार और बीजेपी ने कड़ी निंदा की है।

मैसुरु के पूर्व महाराजा श्रीकांतदत्त नरसिम्हाराजा वाडियार की विधवा प्रमोदा देवी वाडियार ने डीके शिवकुमार के बयान को असंवेदनशील और अनावश्यक बताया। उन्होंने कहा कि इस साल के दशहरा समारोह में राजनीति का प्रवेश चामुंडी हिल्स के पवित्र मंदिर के आसपास अनुचित है। उनके बेटे, बीजेपी सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार ने इसे दुखद और हास्यास्पद करार देते हुए कहा कि चामुंडी हिल्स हिंदुओं की संपत्ति है और उपमुख्यमंत्री का बयान इसे बदल नहीं सकता।

डीके शिवकुमार का बचाव

गुरुवार को डीके शिवकुमार ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि लोग उनके तथ्यपूर्ण बोल को सहन नहीं करते। उन्होंने सोशल मीडिया पर कन्नड़ में लिखा, “चामुंडेश्वरी माता हमारी क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। उनकी पूजा करने वाले उनमें विश्वास करने वाले सभी जातियों और धर्मों में हैं। उनका दर्शन सभी का अधिकार है। माता सभी भक्तों की संपत्ति हैं। यह किसी तक सीमित नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि चामुंडी हिल्स सरकारी संपत्ति है न कि निजी, और यह सभी के लिए खुला है।

विवाद का कितना प्रभाव

डीके शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि वह हिंदू धर्म का पालन करते हैं, लेकिन सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और मानवता में विश्वास रखते हैं। हालांकि, उनके बयान ने बीजेपी और शाही परिवार की तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जिससे यह मुद्दा और गर्म हो गया है। यह विवाद मैसुरु दशहरा जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन में राजनीति के प्रवेश पर सवाल उठा रहा है।