नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) एक्शन में आ गया है। सोमवार सुबह ईडी ने राज्य के चार जिलों-सिलीगुड़ी, हावड़ा, बिधाननगर और दुर्गापुर-में कम से कम 10 ठिकानों पर बड़े पैमाने पर छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क और उससे जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है।
एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, यह तलाशी अभियान धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत चलाया जा रहा है। ईडी को इस मामले से जुड़े कुछ प्रमुख आरोपियों के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर एक साथ कई टीमों ने इन जगहों पर दबिश दी। यह कार्रवाई चुनाव की घोषणा के ठीक एक दिन बाद हुई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी की यह जांच धोखाधड़ी करने वाले “अवैध” कॉल सेंटरों की गतिविधियों से संबंधित है। इन कॉल सेंटरों पर वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। जांच एजेंसी इस नेटवर्क से जुड़े वित्तीय लेन-देन और सबूतों को इकट्ठा करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और अन्य सामग्रियों की जांच की जाएगी ताकि पूरे रैकेट का पर्दाफाश हो सके।
इन लोगों के ठिकानों पर हुई छापेमारी
सूत्रों के मुताबिक, जिन लोगों के परिसरों पर तलाशी ली जा रही है, उनमें सुभाजीत चक्रवर्ती, सम्राट घोष और सुराश्री कर समेत कई अन्य संदिग्ध शामिल हैं। ईडी को शक है कि ये लोग इस पूरी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, अधिकारियों ने इस बात पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है कि क्या इस जांच का संबंध आगामी विधानसभा चुनाव के लिए किसी तरह की राजनीतिक फंडिंग से है या नहीं।
“यह जांच एक अवैध कॉल सेंटर की गतिविधियों से संबंधित है। हम वित्तीय लेन-देन का पता लगाने और सबूत एकत्र करने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं।”- ईडी के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने रविवार को ही पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराने की घोषणा की थी। राज्य में 23 और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को की जाएगी। चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद जांच एजेंसियों की इस सक्रियता को काफी अहम माना जा रहा है।






