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पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, राज्यपाल ने ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर लिया एक्शन, नई सरकार गठन का रास्ता साफ

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
पश्चिम बंगाल में राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा को भंग कर दिया। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने के बाद यह संवैधानिक कदम उठाया गया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग, राज्यपाल ने ममता बनर्जी के इस्तीफे से इनकार पर लिया एक्शन, नई सरकार गठन का रास्ता साफ

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घटनाक्रम ने एक नया मोड़ लिया है, जहां राज्यपाल आरएन रवि ने राज्य की विधानसभा को भंग करने का आदेश जारी किया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय तब आया जब हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ, किंतु मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव में बड़े पैमाने पर वोट चोरी के गंभीर आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा देने से साफ इनकार कर दिया था। इस गतिरोध के मद्देनजर, 2026 की चुनाव प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने के उपरांत, पश्चिम बंगाल के मौजूदा राज्यपाल आरएन रवि ने एक बड़ा और संवैधानिक कदम उठाया है, जिसने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

राज्यपाल आरएन रवि ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 174 के खंड (2) के उपखंड (ख) के तहत उन्हें प्रदत्त असाधारण शक्तियों का विधिवत इस्तेमाल करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा को तत्काल प्रभाव से भंग करने का आदेश जारी किया है। यह संवैधानिक प्रावधान राज्यपाल को राज्य विधानसभा के सत्र को सत्रावसान करने या उसे भंग करने का अधिकार देता है, खासकर नई सरकार के गठन के संदर्भ में। इस कदम को राज्य में संवैधानिक व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने की दिशा में एक आवश्यक प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

इस संबंध में विस्तृत घोषणा बुधवार, 6 मई, 2026 को प्रकाशित एक विशेष गजट नोटिफिकेशन में की गई है। नोटिफिकेशन संख्या: 275-पी.ए./1एल-03/2026 के तहत जारी इस आधिकारिक दस्तावेज में विधानसभा भंग करने संबंधी आदेशों को स्पष्ट रूप से अंकित किया गया है। सरकार के पार्लियामेंट्री अफेयर्स डिपार्टमेंट द्वारा जारी इस महत्वपूर्ण निर्देश के अनुसार, पश्चिम बंगाल की मौजूदा विधानसभा 7 मई, 2026 से औपचारिक रूप से भंग हो जाएगी, जिससे नई विधानसभा के गठन का मार्ग प्रशस्त होगा।

नई विधानसभा के गठन और शपथ ग्रहण का रास्ता साफ

राज्यपाल आरएन रवि द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश को राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला (आईएएस) ने जनहित में प्रकाशित कराया। यह एक सामान्य संवैधानिक प्रथा है कि चुनावों के परिणाम घोषित होने और नई सरकार के पदभार संभालने से पहले पुरानी विधानसभा को भंग कर दिया जाता है, ताकि नई विधानसभा के सदस्य शपथ ग्रहण कर सकें और अपना कार्यभार संभाल सकें। यह प्रक्रिया संवैधानिक निरंतरता और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।

इस आदेश के परिणामस्वरूप, पश्चिम बंगाल की 17वीं विधानसभा का कार्यकाल विधिवत रूप से समाप्त हो गया है। अब, नए चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ 18वीं लेजिस्लेटिव असेंबली के गठन का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। राज्य प्रशासन और राजनीतिक गलियारों में यह उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ दिनों के भीतर ही नई कैबिनेट का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही, नई लेजिस्लेटिव असेंबली का पहला सत्र बुलाने की प्रक्रिया भी शीघ्र ही शुरू कर दी जाएगी, जिससे राज्य में नई सरकार अपना कामकाज शुरू कर सकेगी और जनहित के कार्यों को आगे बढ़ा सकेगी। राज्यपाल का यह कदम राज्य में संवैधानिक प्रक्रियाओं के पालन और नई लोकतांत्रिक सरकार के सुचारु गठन की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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