ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर देश में एक बार फिर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है, जब कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस बड़े सैन्य अभियान के बावजूद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग नहीं पड़ा, जैसा कि सरकार ने दावा किया था। पार्टी का कहना है कि 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान पर जो दबाव बना था, वह ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद नहीं दिखा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक खुलासे करते हुए मोदी सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को रोकने वाले युद्धविराम की पहली घोषणा 10 मई 2025 को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की थी। रुबियो ने यह भी दावा किया था कि यह युद्धविराम तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से संभव हुआ था। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने इस दावे को कई बार दोहराया, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी इसका खंडन नहीं किया।
जयराम रमेश ने सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने यहां तक आरोप लगाया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसीम मुनीर का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो यह दर्शाता है कि पाकिस्तान को अलग-थलग करने की भारत की कूटनीतिक कोशिशें विफल रहीं। कांग्रेस ने यह भी कहा कि इसके उलट अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसीम मुनीर का गर्मजोशी से स्वागत किया है, जो भारत की कूटनीतिक विफलता का प्रमाण है।
कांग्रेस नेता ने अपने आरोपों को और धार देते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के बयान का हवाला दिया। 30 मई 2025 को सिंगापुर में जनरल चौहान ने स्वीकार किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शुरुआती चरण में भारत को सामरिक गलतियों के कारण कुछ नुकसान उठाना पड़ा था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा था कि बाद में रणनीति में सुधार कर भारतीय सेना ने पाकिस्तान के भीतर सटीक हमले किए।
इसके अलावा, कांग्रेस ने 10 जून 2025 को जकार्ता में भारतीय दूतावास के रक्षा अटैची के एक बयान का भी जिक्र किया। रक्षा अटैची ने स्वीकार किया था कि 7 मई 2025 को राजनीतिक नेतृत्व की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत को कुछ लड़ाकू विमान गंवाने पड़े थे। यह आरोप सरकार की सैन्य तैयारियों और निर्णयों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
हथियार से लेकर सैटेलाइट इमेजरी तक मिली सहायता का दावा
सबसे बड़ा खुलासा उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के 4 जुलाई 2025 के बयान से हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को चीन से गहरी मदद मिली थी। इसमें न केवल हथियार और गोला-बारूद शामिल थे, बल्कि सैटेलाइट इमेजरी और रियल-टाइम टारगेटिंग सपोर्ट भी दिया गया था। यह तथ्य भारत की सुरक्षा चुनौतियों को एक नए आयाम पर ले जाता है।
चीन से मिली इस व्यापक मदद के बावजूद, कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का चीन के प्रति नरम रुख जारी है। पार्टी ने लद्दाख में भारतीय सेना के पारंपरिक गश्त अधिकारों के नुकसान, चीन से रिकॉर्ड आयात और एफडीआई नियमों में दी गई ढील जैसे मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गहन समीक्षा की मांग
कांग्रेस ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की गहन समीक्षा की भी मांग की है। जयराम रमेश ने 1999 के कारगिल युद्ध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार द्वारा गठित के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली कारगिल समीक्षा समिति का उदाहरण दिया। कांग्रेस ने संकेत दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के घटनाक्रमों की जांच और भविष्य के लिए सुझाव देने हेतु ऐसी ही एक समिति की आवश्यकता है।
यह सब ऐसे समय में सामने आया है जब देश ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ मना रहा है। गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों, जिनमें अधिकतर पर्यटक थे, की मौत के बाद भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था, लेकिन 10 मई को सैन्य अधिकारियों के बीच हॉटलाइन वार्ता के बाद सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनी थी।
आज हम ऑपरेशन सिंदूर के लॉन्च की पहली वर्षगांठ मना रहे हैं और अपने सशस्त्र बलों की उपलब्धियों को सलाम कर रहे हैं, ऐसे में निम्नलिखित बातों को याद करना जरूरी है:
1. ऑपरेशन सिंदूर को अप्रत्याशित रूप से रोकने वाले युद्धविराम की पहली घोषणा 10 मई 2025 को शाम 5:37 बजे अमेरिकी विदेश… pic.twitter.com/HJoUA9QvFF
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 7, 2026






