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3 और 4 सितंबर को होगी GST काउंसिल की 56वीं बैठक, जानिए क्यों टिकीं है इसपर देश की निगाहें

Written by:Rishabh Namdev
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सितंबर के शुरुआती हफ्ते में ही जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक होने वाली है। इस बैठक में जीएसटी रिफॉर्म्स पर चर्चा संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त के दिन बड़ा ऐलान किया गया था। तब जीएसटी स्ट्रक्चर में सुधार को लेकर इस बैठक में चर्चा की जाएगी।
3 और 4 सितंबर को होगी GST काउंसिल की 56वीं बैठक, जानिए क्यों टिकीं है इसपर देश की निगाहें

नई दिल्ली में तीन और चार सितंबर को जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक होगी। इस बैठक में केंद्र सरकार के तीन स्तंभ वाले जीएसटी रिफॉर्म्स पर चर्चा की जाएगी। संभावना है कि जीएसटी 2.0 में टैक्स की दरों में बड़े पैमाने पर बदलाव किया जाएगा। न सिर्फ जीएसटी स्ट्रक्चर में सुधार किया जाएगा और आम आदमी को राहत दी जाएगी, बल्कि काउंसिल सरकार द्वारा प्रस्तावित 2 रेट जीएसटी स्ट्रक्चर पर भी चर्चा करेगी।

गुरुवार को जीओं ने जीएसटी रिफॉर्म्स के तहत 12% और 28% स्लैब को 5% और 18% स्लैब में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है। अब इस निर्णय को लेकर जीएसटी काउंसिल की बैठक में आखिरी फैसला लिया जाएगा। सरकार द्वारा 40% की दर से शराब, जुआ, तंबाकू जैसे फाइनल गुड्स पर जीएसटी लगाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया वादा

जानकारी दे दें कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से जीएसटी दरों को कम करने का वादा किया था। प्रधानमंत्री का कहना था कि दिवाली तक देश के आम नागरिकों को डबल मुनाफा होगा और उन्हें बड़ा गिफ्ट मिलेगा। दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की संशोधित व्यवस्था में सिर्फ दो टैक्स रेट 5% और 18% का प्रस्ताव रखा गया है। ऐसे में 12% और 28% वाले टैक्स स्लैब समाप्त किए जा सकते हैं। इससे आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी, कई चीजें सस्ती हो जाएंगी और जीएसटी के घटने से लोगों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा।

जानिए क्या बदलाव होंगे?

बता दें कि मौजूदा समय में कुल चार टैक्स स्लैब हैं 0%, 5%, 12%, 18% और 28%। अब इन्हें घटाकर दो स्लैब में किया जा सकता है स्टैंडर्ड और मेरिट। दरअसल, देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अब जीएसटी स्ट्रक्चर में 5% से कम का एक स्लैब स्पेशल तौर पर रखा जा सकता है। साथ ही 40% का भी एक स्लैब प्रस्तावित किया गया है। इस स्लैब में 5 से 7 हानिकारक वस्तुओं को शामिल किया जा सकता है। वहीं, 12% वाले स्लैब में शामिल 99% वस्तुएं 5% वाले स्लैब में आ जाएंगी, जबकि मौजूदा समय में जो 28% वाले स्लैब में शामिल हैं, उनमें से 90% वस्तुएं 18% स्लैब में आ जाएंगी।

Rishabh Namdev
लेखक के बारे में
मैं ऋषभ नामदेव खेल से लेकर राजनीति तक हर तरह की खबर लिखने में सक्षम हूं। मैं जर्नलिज्म की फील्ड में पिछले 4 साल से काम कर रहा हूं। View all posts by Rishabh Namdev
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