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ज्ञानेश कुमार सहित तीन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, प्रक्रिया पर उठे सवाल

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। याचिकाकर्ता ने खोज समिति के पैनल से लेकर चयन समिति को जानकारी उपलब्ध कराने तक के तरीके पर आपत्ति जताई है।
Supreme Court

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सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की नियुक्तियों को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता सूरी पसाला ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू की नियुक्ति पर सवाल

याचिका में 14 मार्च 2024 की उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है जिसके जरिए ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फरवरी 2025 में ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त बनाए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।

दो पदों के लिए छह नाम भेजने पर आपत्ति 

याचिकाकर्ता ने खास तौर पर 2024 में हुई नियुक्तियों के दौरान खोज समिति की ओर से तैयार किए गए नामों के पैनल को लेकर आपत्ति जताई है। याचिका के मुताबिक उस समय चुनाव आयुक्त के दो पद खाली थे। कानून में हर रिक्त पद के लिए पांच नामों का पैनल तैयार किए जाने का प्रावधान है। इस हिसाब से 10 नाम होने चाहिए थे लेकिन खोज समिति ने चयन समिति के सामने सिर्फ छह नाम रखे।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का दिया हवाला

याचिका में 22 मार्च 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया गया है। इसमें नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अदालत के सामने यह बात आई थी कि चयन समिति के सदस्यों को उम्मीदवारों से जुड़ी पूरी जानकारी पर्याप्त समय पहले मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ता का आरोप है कि 14 मार्च 2024 को खोज समिति ने छह नामों की सिफारिश की और उसी दिन चयन समिति ने ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू के नामों को मंजूरी दे दी।

पात्रता और चुनावी अनुभव पर भी सवाल

इस याचिका में नियुक्तियों के लिए तय पात्रता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। 2023 के कानून के मुताबिक चुनाव आयुक्त के पद पर नियुक्ति के लिए ऐसे व्यक्ति पात्र हैं, जो भारत सरकार में सचिव या समकक्ष पद पर रह चुके हों और जिन्हें चुनावों के प्रबंधन और संचालन का पर्याप्त ज्ञान एवं अनुभव हो। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि तीनों नियुक्तियों में इन प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए।

तीनों नियुक्तियों पर क्वो वारंटो की मांग

सूरी पसाला ने सुप्रीम कोर्ट से नियुक्तियों से जुड़ी खोज समिति और चयन समिति के रिकॉर्ड मंगाने की मांग की है। याचिका में तीनों अधिकारियों के खिलाफ क्वो वारंटो की रिट जारी करने की मांग की गई है। इसके तहत अदालत किसी व्यक्ति से यह स्पष्ट करने को कह सकती है कि वह किस कानूनी अधिकार के तहत किसी सार्वजनिक पद पर बना हुआ है।

Shruty Kushwaha
लेखक के बारे में
2001 में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से पत्रकारिता में स्नातकोत्तर (M.J, Masters of Journalism)। 2001 से 2013 तक ईटीवी हैदराबाद, सहारा न्यूज दिल्ली-भोपाल, लाइव इंडिया मुंबई में कार्य अनुभव। साहित्य पठन-पाठन में विशेष रूचि। View all posts by Shruty Kushwaha →
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