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जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का कहर, सड़कें बंद और 58 उड़ानें रद्द

Written by:Bhawna Choubey
Published:
कश्मीर घाटी में लगातार हो रही भारी बर्फबारी ने आम लोगों की जिंदगी रोक दी है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से लेकर श्रीनगर एयरपोर्ट पर 58 उड़ानों के रद्द होने तक हालात गंभीर बने हुए हैं। यातायात, पर्यटन और आपात सेवाओं पर सीधा असर पड़ा है।
जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का कहर, सड़कें बंद और 58 उड़ानें रद्द

जम्मू-कश्मीर एक बार फिर कुदरत की सख्ती का सामना कर रहा है। बीते कुछ दिनों से हो रही लगातार बर्फबारी ने घाटी के जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। सर्द हवाओं और भारी हिमपात के चलते सड़क, रेल और हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

मंगलवार 27 जनवरी को हालात उस समय और बिगड़ गए, जब जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह बंद करना पड़ा और श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं। इस स्थिति ने न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि पर्यटकों और जरूरी सेवाओं को भी गंभीर मुश्किल में डाल दिया है।

श्रीनगर एयरपोर्ट पर उड़ानें रद्द सैकड़ों यात्री फंसे

जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का सबसे बड़ा असर हवाई यातायात पर देखने को मिला। श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से कुल 58 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जिनमें 29 आगमन और 29 प्रस्थान की उड़ानें शामिल हैं। लगातार हो रही बर्फबारी के कारण रनवे पर बर्फ जम गई, जिससे उड़ानों का संचालन असुरक्षित हो गया।

एयरपोर्ट अधिकारियों के अनुसार दृश्यता कम होने और रनवे फिसलन भरा होने के कारण किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जा सकता था। सभी उड़ानों को रद्द करने का फैसला लिया गया। इससे सैकड़ों यात्री एयरपोर्ट और होटलों में फंस गए। कई पर्यटक जो घाटी से बाहर लौटने की तैयारी में थे अब मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद

जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी का दूसरा बड़ा असर सड़क यातायात पर पड़ा है। घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह बंद कर दिया गया है। काजीगुंड और बनिहाल के बीच भारी मात्रा में बर्फ जमा होने के कारण किसी भी वाहन को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

यह राजमार्ग जम्मू-कश्मीर की जीवनरेखा माना जाता है। इसके बंद होने से रोजमर्रा की जरूरतों का सामान, फल-सब्जियां, ईंधन और दवाइयों की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जब तक मौसम साफ न हो जाए तब तक अनावश्यक यात्रा से बचें।

सड़क से बर्फ हटाने के लिए बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन और स्थानीय एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। भारी मशीनों की मदद से बर्फ हटाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन लगातार हो रही बर्फबारी राहत कार्य में बाधा बन रही है।

पर्यटन स्थलों पर बर्फ की मोटी चादर

घाटी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर इस बर्फबारी का खास असर देखने को मिला है। सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम जैसे इलाकों में बर्फ की मोटी परत जम गई है। पहाड़, सड़कें और घर पूरी तरह सफेद चादर में ढक गए हैं।

जहां एक ओर यह नजारा पर्यटकों के लिए आकर्षक है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों के लिए यह परेशानी का कारण बन गया है। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है और पानी की पाइपलाइन जमने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूलों में उपस्थिति भी कम देखी जा रही है। कुछ क्षेत्रों में प्रशासन ने एहतियातन स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया है। ठंड और बर्फ के कारण बुजुर्गों और बच्चों को खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

रेल सेवाएं भी प्रभावित

भारी बर्फबारी का असर रेल सेवाओं पर भी देखने को मिला। बनिहाल और बडगाम के बीच कुछ ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द करना पड़ा। हालांकि, रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही पटरियों से बर्फ हटाई गई, कुछ ही घंटों में रेल सेवाएं फिर से शुरू कर दी गईं।

जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन टीमें पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। कई इलाकों में पुलिसकर्मी बर्फ से ढकी सड़कों पर मरीजों को स्ट्रेचर पर उठाकर अस्पताल पहुंचाते नजर आए। कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को तुरंत मदद मिल सके।

मौसम विभाग की चेतावनी और आगे की स्थिति

मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 से 48 घंटों तक कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी जारी रह सकती है, जबकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही हिमस्खलन का खतरा भी जताया गया है, खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में।