ईरान और इजराइल के बीच जारी जंग लगातार गहराती जा रही है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर है। इस गंभीर स्थिति के बीच भारत सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने पश्चिम एशिया विवाद से पैदा होने वाले हर मामले पर पैनी नजर रखने के लिए एक उच्चस्तरीय अंतर-मंत्रालयी समूह का गठन किया है। इस शक्तिशाली समूह की कमान देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को सौंपी गई है।

इस समूह में सिर्फ रक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि देश के कुछ और सबसे अहम मंत्री भी शामिल हैं। गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी इसके मुख्य सदस्य हैं। इनके अलावा भी कई दूसरे मंत्री इस समूह का हिस्सा हैं, जो अपने-अपने विभागों से जुड़ी चुनौतियों और समाधानों पर काम करेंगे। इस समिति का गठन दिखाता है कि भारत सरकार पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक हालात को कितनी गंभीरता से ले रही है। इसका मकसद भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखना है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत के लिए कच्चे तेल और गैस का बड़ा स्रोत है, साथ ही यहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी भी रहते हैं।

पीएम मोदी ने संसद में बताई भारत की व्यापक रणनीति 

इस अंतर-मंत्रालयी समूह के औपचारिक गठन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में पश्चिम एशिया संकट पर विस्तार से बात की थी। उन्होंने बताया था कि भारत सरकार ने पहले से ही एक अंतर-मंत्रालयी समूह बना रखा है, जो लगातार मिलता रहता है। प्रधानमंत्री ने संसद को बताया कि यह समूह भारत के आयात और निर्यात पर आने वाली हर तरह की दिक्कत का आकलन करता है। साथ ही, यह समूह इन समस्याओं को दूर करने और आवश्यक समाधान निकालने के लिए लगातार काम करता रहा है। प्रधानमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया था कि सरकार वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर पड़ने वाले असर को लेकर कितनी सतर्क है। यह नया समूह उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, लेकिन इसका फोकस सीधे तौर पर पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संसदीय संबोधन में भारत की एक और महत्वपूर्ण पहल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह कोरोना महामारी के मुश्किल दौर में अलग-अलग सेक्टरों की चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञों और अधिकारियों के कई समूह बनाए गए थे, ठीक उसी तर्ज पर ‘कल ही’ सात नए समूहों का भी गठन किया गया है। इन समूहों का मुख्य काम देश की सप्लाई चेन को सुचारू रखना, पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखना, उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करना और गैस आपूर्ति को मजबूत करना है। इसके साथ ही, ये समूह महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए भी त्वरित और दूरगामी रणनीतियों के तहत कार्रवाई करेंगे।

देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगी समिति

प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन साझा और संगठित प्रयासों से भारत वैश्विक परिस्थितियों का बेहतर तरीके से सामना कर पाएगा। ये सात नए समूह, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले अंतर-मंत्रालयी समूह के साथ मिलकर, देश को किसी भी बड़े झटके से बचाने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद करेंगे। यह दिखाता है कि सरकार न केवल राजनीतिक और सैन्य तनाव पर नजर रख रही है, बल्कि उसके आर्थिक नतीजों से निपटने के लिए भी पूरी तरह तैयार है। इन कदमों से भारत की आत्मनिर्भरता और संकट प्रबंधन क्षमता को मजबूती मिलेगी।