केंद्र सरकार ने ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध से पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले के तहत, पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई है, यह कदम ऐसे नाजुक समय में उठाया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर युद्ध का सीधा असर दिख रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को बेतहाशा बढ़ने से रोकना है, ताकि आम जनता और अर्थव्यवस्था पर इसका बोझ कम पड़े।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रूपए घटाई गई है। मोदी सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की आधी आपूर्ति बाधित होने की खबरें हैं। यह स्थिति न केवल भारत, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय बन गई है। इस बड़े कदम को ऊर्जा संकट से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या पेट्रोल और डीजल के दाम सीधे तौर पर घटेंगे?
हालांकि, आम जनता के मन में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ रहा है कि क्या इस एक्साइज ड्यूटी में कटौती से पेट्रोल और डीजल के दाम सीधे तौर पर घटेंगे? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ऐसा होने की संभावना कम है। बताया जा रहा है कि यह कटौती मुख्य रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पिछले लंबे समय से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बावजूद, इन कंपनियों ने सरकार के निर्देश पर या खुदरा कीमतों को स्थिर रखने के लिए दाम नहीं बढ़ाए थे, जिससे उन्हें भारी वित्तीय घाटा उठाना पड़ा था। ऐसे में, ये कंपनियां इस कटौती का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय अपने घाटे को पाटने में इस्तेमाल कर सकती हैं। इसका मतलब है कि सीधे तौर पर कीमतों में कमी भले ही न हो, लेकिन भविष्य में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर निश्चित रूप से लगाम लगेगी। यह कदम पेट्रोलियम कंपनियों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करने के साथ-साथ आम लोगों को बढ़ती महंगाई से बचाने में भी सहायक होगा।
मंत्रालय ने किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। देश ने अगले 60 दिन के लिए अपनी जरूरत का पर्याप्त कच्चा तेल अन्य स्रोतों से सुरक्षित कर लिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस संबंध में एक बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि देश भर के सभी पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त भंडार मौजूद है और वे सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। मंत्रालय ने किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील करते हुए यह भी कहा है कि पेट्रोल या डीजल की कोई राशनिंग नहीं की जा रही है। यह आश्वासन देश में ईंधन की उपलब्धता को लेकर बनी चिंता को दूर करने के लिए दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की घबराहट में खरीददारी (पैनिक बाइंग) को रोका जा सके।
हाल के दिनों में, देश के कुछ राज्यों में अफवाहों के कारण पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक और असामान्य वृद्धि देखी गई है। पिछले दो दिनों में, अखिल भारतीय स्तर पर ईंधन की बिक्री में 15% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कुछ स्थानों पर तो यह वृद्धि औसत दैनिक बिक्री की तुलना में 50% से अधिक तक पहुंच गई है। इस तरह की पैनिक बाइंग अक्सर गलत सूचनाओं या आपूर्ति में संभावित कमी की आशंका से प्रेरित होती है, भले ही जमीनी हकीकत कुछ और हो। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भंडार पर्याप्त है, लेकिन अचानक बढ़ी हुई मांग स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला पर क्षणिक दबाव डाल सकती है, जिससे कुछ समय के लिए असुविधा हो सकती है। सरकार और तेल कंपनियां इस स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।
मंत्रालय ने एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है, जिसमें बताया गया है कि विशेषकर छोटे शहरों में कुछ पेट्रोल पंपों को पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा ‘कैश-एंड-कैरी’ यानी नकद भुगतान प्रणाली लागू किए जाने के बाद ईंधन की आपूर्ति में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इस प्रणाली के तहत, छोटे डीलर को ईंधन खरीदने के लिए तुरंत नकद भुगतान करना होता है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी पर दबाव पड़ता है। यह आपूर्ति की कमी का संकेत बिल्कुल नहीं है, बल्कि यह भुगतान प्रणाली से जुड़ी एक अस्थायी परिचालन चुनौती है जिसका सामना कुछ सीमित स्थानों पर हो रहा है। बड़े शहरों और अधिकांश अन्य क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।






