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‘गांधी परिवार ही मेरा भगवान’, आरएसएस गान विवाद पर डीके शिवकुमार ने क्या कहा

Written by:Mini Pandey
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उन्होंने बेंगलुरु में कहा, "मैं गांधी परिवार और कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी दोहराना चाहता हूं। मैं जन्म से कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं और मरते दम तक कांग्रेस के साथ रहूंगा। गांधी परिवार मेरा भगवान है।"
‘गांधी परिवार ही मेरा भगवान’, आरएसएस गान विवाद पर डीके शिवकुमार ने क्या कहा

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को विधानसभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का गान गाने के लिए तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एक 73 सेकंड के वीडियो में उन्हें आरएसएस का गान “नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे” गाते देखा गया, जिसके बाद विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस पर निशाना साधा। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर भी असहजता पैदा की, जिसके चलते शिवकुमार ने एक नया माफीनामा जारी किया है।

शिवकुमार ने कहा, “मेरा इरादा कभी भी आरएसएस की प्रशंसा करना नहीं था। मैं 1980 से कांग्रेस के साथ हूं और मैंने देश के विभिन्न राजनीतिक दलों के इतिहास का अध्ययन किया है। बीजेपी ने मुझे तिहाड़ जेल में यातनाएं दीं। अगर मेरे कार्य से किसी को ठेस पहुंची है तो मैं माफी मांगता हूं।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह हमेशा कांग्रेस के साथ रहेंगे और गांधी परिवार के प्रति उनकी निष्ठा अटूट है।

कांग्रेस के प्रति वफादारी

उन्होंने बेंगलुरु में कहा, “मैं गांधी परिवार और कांग्रेस के प्रति अपनी वफादारी दोहराना चाहता हूं। मैं जन्म से कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं और मरते दम तक कांग्रेस के साथ रहूंगा। गांधी परिवार मेरा भगवान है।” इस घटना ने बीजेपी को कांग्रेस पर तंज कसने का मौका दिया, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में आरएसएस का जिक्र करने की आलोचना की थी। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह घटना राहुल गांधी और उनके करीबियों के लिए आईसीयू/कोमा मोड जैसी स्थिति है।

माफी मांगने को कहा

कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर असंतोष देखा गया। पार्टी के वरिष्ठ नेता बीके हरिप्रसाद ने शिवकुमार से माफी मांगने को कहा, क्योंकि वह राज्य कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में इस तरह का कदम नहीं उठा सकते। वहीं, शिवकुमार के कैबिनेट सहयोगी जी परमेश्वर ने कहा कि पार्टी हाईकमान अपने नेताओं के कार्यों पर नजर रखता है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगा। इस विवाद ने कर्नाटक की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है।