राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है। दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महासचिव केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में हर तथ्य सामने आना जरूरी है और जांच ऐसी होनी चाहिए जिस पर सभी पक्ष भरोसा कर सकें।
दरअसल अपने पत्र में केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान से जुड़ी कथित गड़बड़ियों ने लोगों को चिंतित किया है। उनका कहना है कि अगर इस तरह के आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तो इससे लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पूरे मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करने की भी अपील की।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस ने उठाए कई सवाल
वहीं केसी वेणुगोपाल ने अपने पत्र में दावा किया है कि शुरुआती जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनकी गहराई से जांच होना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता और इसकी पूरी सच्चाई सामने लाने के लिए व्यापक जांच की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित तौर पर कई महीनों के CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने या नष्ट होने के आरोप बेहद गंभीर हैं और इसकी अलग से जांच कराई जानी चाहिए।

एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए
दरअसल कांग्रेस नेता ने एफआईआर दर्ज होने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में अगर शिकायत और एफआईआर के बीच लंबा अंतर रहा है तो उसके कारण स्पष्ट किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अब तक हुई कार्रवाई में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, जबकि पूरे सिस्टम की जवाबदेही तय होना बाकी है। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट अभी आना बाकी है और मामले की जांच जारी है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग
दरअसल केसी वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जानी चाहिए ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। उनका कहना है कि राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की स्वतंत्रता को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी जांच में केवल निचले स्तर पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।






