दशहरे से पहले केरलम सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ा तोहफा दिया है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (Dearness Allowance – DA) और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) में 2% की बढ़ोतरी की है। इस फैसले के बाद अब महंगाई भत्ता 35% से बढ़कर 37% हो गया है।
वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नई दरें अक्टूबर 2026 से प्रभावी होंगी। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता अक्टूबर के वेतन के साथ दिया जाएगा, जिसका भुगतान नवंबर में होगा।वहीं संशोधित महंगाई राहत नवंबर 2026 की पेंशन के साथ दी जाएगी। इसका लाभ सभी नियमित कर्मचारियों, शिक्षकों, सहायता प्राप्त स्कूलों और कॉलेजों के स्टाफ, पूर्णकालिक आकस्मिक कर्मचारियों और स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को मिलेगा। इसके दायरे में राज्य सेवा के पेंशनभोगी, पारिवारिक पेंशनभोगी, अनुग्रह पेंशनभोगी भी आएंगे।
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केरल के वित्त (पे रिसर्च यूनिट) विभाग ने यूजीसी/AICTE/और मेडिकल एजुकेशन स्कीम के तहत आने वाले शिक्षण कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में संशोधन के आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसके तहत जो शिक्षण कर्मचारी 2016 के संशोधित UGC/AICTE/मेडिकल एजुकेशन वेतनमान में आ चुके हैं, उनका महंगाई भत्ता मौजूदा 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है। इसके साथ ही संशोधित पेंशन पाने वाले पेंशनभोगियों की महंगाई राहत (DR) भी 58% से बढ़कर 60% होगी।
इसके अलावा जो कर्मचारी अब भी छठे UGC/AICTE/मेडिकल एजुकेशन वेतनमान पर बने हुए हैं, उनके लिए महंगाई भत्ते की दर को 257% से बढ़ाकर 262% कर दिया गया है। ऐसे पेंशनभोगी जिनकी पेंशन संशोधित नहीं हुई थी, उन्हें भी अब 262% की दर से महंगाई राहत मिलेगी। बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता अक्टूबर 2026 के वेतन के साथ जुड़कर आना शुरू होगा, जिसका नकद भुगतान कर्मचारियों को नवंबर 2026 में किया जाएगा। पेंशनभोगियों को बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ नवंबर 2026 की पेंशन के साथ मिलेगा, जो नवंबर महीने में ही वितरित की जाएगी।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 01.01.2026 से प्रभावी होने वाले इस भत्ते के पिछले बकाये (एरियर) के भुगतान के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश व आदेश बाद में अलग से जारी किए जाएंगे। यह बढ़ी हुई दरें अनुदान प्राप्त (ग्रंट-इन-एड) संस्थानों (जैसे RCC, MCC आदि) और विश्वविद्यालयों पर भी लागू होंगी, बशर्ते वहां सरकारी आदेश के तहत इन योजनाओं को लागू किया गया हो। हालांकि, संस्थानों को यह दर लागू करने से पहले अपने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स, मैनेजिंग कमेटी या गवर्निंग बॉडी से मंजूरी लेनी होगी और यह फंड की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
