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RAW चीफ की कितनी होती है सैलरी? कौन-कौन से मिलते है भत्ते? क्या क्या रहती है जिम्मेदारी? यहां जानें सबकुछ

Written by:Pooja Khodani
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पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर नजर रखने, आतंकवाद और साइबर वारफेयर से जुड़ी खुफिया सूचनाएं जुटाने में रॉ और रॉ चीफ की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है लेकिन क्या आप जानते है एक रॉ चीफ को कितनी सैलरी मिलती है, आईए जानते है विस्तार से.........
RAW चीफ की कितनी होती है सैलरी? कौन-कौन से मिलते है भत्ते? क्या क्या रहती है जिम्मेदारी? यहां जानें सबकुछ

रॉ यानि रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) । यह एक देश की सबसे गुप्त और शक्तिशाली खुफिया एजेंसी है, जिसकी जिम्मेदारी बाहरी सुरक्षा से जुड़ी हर सूचना को समय रहते इकट्ठा कर भारत सरकार को देना होता है।यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर डालने वाले पड़ोसी देशों के घटनाक्रमों पर नजर रखती है ।

28 जून 2025 को केंद्र सरकार ने 1989 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस पराग जैन को रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का नया प्रमुख नियुक्त किया है।उनका कार्यकाल 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगा और वे इस पद पर अगले दो वर्षों तक सेवा देंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि भारत में रॉ में चीफ को कितना वेतन मिलता है? कौन कौन से भत्ते और सुविधाएं दी जाती है। आईए जनते है विस्तार से…

कितनी मिलती है सैलरी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रॉ चीफ की सैलरी आमतौर पर एक हाई क्लास सरकारी अफसर के बराबर होती है, जो 2.5 लाख रुपये प्रति महीने होती है। इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता (DA), आवास भत्ता, यात्रा भत्ता (Travelling Allowance), मेडिकल जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।इन सभी सुविधाओं को मिलाकर उनकी कुल सैलरी 3.5 लाख से 4 लाख रुपये प्रति महीने के करीब तक हो सकती है। रॉ के प्रमुख को कैबिनेट सचिवालय में सचिव का दर्जा मिलता है। वो कैबिनेट सचिव की तरह के लाभों के हकदार होते हैं।

कैसे होती है रॉ चीफ की भर्ती

  • रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) में अधिकारी बनने के लिए कोई सीधा भर्ती प्रक्रिया नहीं है। यह भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी है और इसमें शामिल होने के लिए उम्मीदवार का भारतीय नागरिक और आयु 56 वर्ष से कम होना अनिवार्य है।
  • न्यूनतम स्नातक डिग्री (किसी भी स्ट्रीम में), विदेशी भाषाओं, कंप्यूटर ज्ञान और एनालिटिकल स्किल्स को प्राथमिकता दी जाती है।
  • भर्ती से पहले उसका बैकग्राउंड चेक किया जाता है।तेज दिमाग, गोपनीयता बनाए रखने की क्षमता ,उत्कृष्ट निर्णय लेने की क्षमता, विदेशी भाषाओं का ज्ञान (विशेष रूप से क्षेत्रीय या अंतरराष्ट्रीय भाषाएं), एनालिटिकल और स्ट्रैटेजिक थिंकिंग का होना जरूरी है।

पराग जैन की इन मामलों पर रहेगी नजर

  • 1989 बैच के पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी है। SSP चंडीगढ़, कनाडा व श्रीलंका में भारतीय प्रतिनिधि के रूप में और जम्मू-कश्मीर में काउंटर टेररिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं।
  • वर्तमान में RAW में स्पेशल सेक्रेटरी पद पर कार्यरत है और अब 1 जुलाई से रॉ चीफ की पोस्ट संभालेंगे। पराग जैन को आतंकवाद निरोधक विशेषज्ञ माना जाता है और उन्हें खास तौर पर अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल है।
  •  RAW की भूमिका चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की गतिविधियों पर नजर रखने, आतंकवाद और साइबर वारफेयर से जुड़ी खुफिया सूचनाएं जुटाने में अहम रहती है।

नोट: यह जानकारी विभिन्न स्त्रोतो से जुटाई गई है, जिसमें बदलाव हो सकता है।

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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 9 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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