मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया कि मराठा आरक्षण आंदोलन समाप्त हो चुका है, क्योंकि मांगों का समाधान हो गया है। जरांगे ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया, जिसमें पात्र मराठाओं को कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है, जिससे वे अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के तहत आरक्षण लाभ प्राप्त कर सकेंगे। यह जानकारी जरांगे ने बुधवार को हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की।
हाईकोर्ट ने जरांगे की इस दलील को स्वीकार किया, लेकिन अदालत ने आंदोलन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि इन नुकसानों की भरपाई कौन करेगा। जरांगे के वकीलों, सतीश मानेशिंदे और वी एम थोराट ने दावा किया कि आंदोलन के दौरान कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, केवल आम लोगों को असुविधा हुई। अदालत ने जरांगे और उनकी टीम को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया, जिसमें उनकी भूमिका स्पष्ट करने और उकसाने के आरोपों का खंडन करने को कहा गया है।
आजाद मैदान खाली करने का अल्टीमेटम
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को जरांगे और उनके समर्थकों को मुंबई के आजाद मैदान को तुरंत खाली करने का अल्टीमेटम दिया था, क्योंकि आंदोलन बिना अनुमति के अवैध था। हालांकि, बाद में जरांगे के अनुरोध पर कोर्ट ने उन्हें बुधवार सुबह तक रुकने की अनुमति दी, क्योंकि समाधान की संभावना थी। जरांगे ने 29 अगस्त से आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू की थी, जिसे मंगलवार शाम को समाप्त कर दिया गया, जब सरकार ने कुणबी जाति प्रमाणपत्र जारी करने के लिए एक समिति गठन करने का सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किया।
उकसाने के आरोपों का खंडन
रिपोर्ट के अनुसार, जरांगे और उनके समर्थकों ने सरकार के इस कदम के बाद आजाद मैदान खाली कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जरांगे और उनकी टीम हलफनामा दाखिल कर उकसाने के आरोपों का खंडन करते हैं, तो कोई प्रतिकूल आदेश पारित नहीं किया जाएगा और याचिकाओं का निपटारा कर दिया जाएगा। इस मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।





