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सोमवार को नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन, प्रधानमंत्री मोदी देशभर की महिलाओं से करेंगे संवाद, महिला आरक्षण कानून में बदलावों पर होगी चर्चा

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल सुबह ग्यारह बजे 'नारी शक्ति वंदन सम्मेलन' में देशभर की महिलाओं को संबोधित करेंगे, जहां महिला आरक्षण कानून में बदलावों पर चर्चा होगी। इसका मुख्य उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण 2029 के आम चुनाव से लागू करना है। यह सम्मेलन 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले हो रहा है, जिसमें संबंधित संविधान संशोधन बिलों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
सोमवार को नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन, प्रधानमंत्री मोदी देशभर की महिलाओं से करेंगे संवाद, महिला आरक्षण कानून में बदलावों पर होगी चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार सुबह ग्यारह बजे विज्ञान भवन में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में देशभर की महिलाओं को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह विभिन्न सेक्टरों में काम कर रही जानी-मानी महिलाओं के साथ सीधा संवाद भी करेंगे, जिससे उनकी चुनौतियों और सुझावों को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सके। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित बदलावों पर विचार करना और उन्हें अंतिम रूप देना है, ताकि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण 2029 के आम चुनाव से ही लागू किया जा सके। वर्तमान कानून के प्रावधानों के तहत यह आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, जिससे महिलाओं को उनके वाजिब प्रतिनिधित्व के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता।

यह महत्वपूर्ण सम्मेलन 16 अप्रैल से शुरू हो रहे संसद के विशेष सत्र से ठीक पहले हो रहा है, जिससे इसकी अहमियत और बढ़ जाती है। इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून से जुड़े संविधान संशोधन बिलों को मंजूरी देने पर प्रमुखता से चर्चा होगी। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित इस भव्य सम्मेलन में देश भर से विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित महिलाओं को आमंत्रित किया गया है। इन महिलाओं में सरकार, शिक्षा, विज्ञान, खेल, उद्यमिता, मीडिया, सामाजिक कार्य और संस्कृति जैसे विविध क्षेत्रों से प्रतिनिधि शामिल हैं, जो एक मंच पर आकर अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा करेंगी। यह मंच विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं को एक साथ लाने और उनके मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर संवाद स्थापित करने का अवसर देगा।

सम्मेलन में महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी यादव, राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और महिला आयोग की अध्यक्ष विजया के रहाटकर जैसी प्रमुख हस्तियां भी शामिल होंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक, निर्णय में नारी, नव भारत की तैयारी’ के सशक्त नारे के साथ किया जा रहा है, जो महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए ‘Women Led Development’ यानी महिला-नेतृत्व वाले विकास की दिशा में आगे बढ़ना अनिवार्य है। यह सम्मेलन इसी संदेश को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाएगा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं का नेतृत्व और सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। सभी वर्तमान महिला सांसदों को भी इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है, ताकि वे इस राष्ट्रीय संवाद का हिस्सा बन सकें।

महिला आरक्षण को लागू करने पर बनेगी रणनीति

सितंबर 2023 में संसद ने ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण एक्ट के नाम से जाना जाता है। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान करता है, जो भारतीय विधायिका में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम था। इस अधिनियम के पारित होने के साथ, देश में लैंगिक समानता और महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की एक नई सुबह की उम्मीद जगी थी। हालांकि, इस कानून में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी था कि महिलाओं का यह कोटा 2027 की जनगणना के आधार पर होने वाले डिलिमिटेशन (परिसीमन) का काम पूरा होने के बाद ही लागू होगा।

इस प्रावधान का सीधा मतलब था कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। यह देरी कई हलकों में चिंता का विषय बनी हुई थी, क्योंकि यह महिलाओं को उनके संवैधानिक अधिकार से लंबे समय तक वंचित रखता। केंद्र सरकार अब इस समय-सीमा में बदलाव चाहती है, ताकि यह महत्वपूर्ण आरक्षण अगले लोकसभा चुनाव यानी 2029 से ही लागू हो सके। सरकार की यह पहल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की प्रक्रिया को तेज करने और उन्हें जल्द से जल्द निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में लाने के उद्देश्य से की जा रही है। इसी मकसद से ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बदलाव की जरूरत महसूस की गई है, और कल का सम्मेलन इन बदलावों की रूपरेखा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महिला आरक्षण को लेकर 16 अप्रैल से संसद में चर्चा

पूरे देश में महिला आरक्षण को जल्द से जल्द और प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए, बजट सत्र को बढ़ाया गया है और 16 अप्रैल से संसद की तीन दिन की विशेष बैठक बुलाई जा रही है। इस बैठक में संविधान संशोधन बिलों पर गहन चर्चा होगी और उन्हें मंजूरी दिलाने का प्रयास किया जाएगा, जिनका प्राथमिक उद्देश्य आरक्षण के कार्यान्वयन की समय-सीमा को संशोधित करना है। यदि ये प्रस्तावित बदलाव संसद द्वारा पारित हो जाते हैं, तो लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह आंकड़ा भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को एक अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा देगा और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में उनकी आवाज को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वपूर्ण विधायी पहल के लिए सभी राजनीतिक दलों के लोकसभा और राज्यसभा नेताओं को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखकर संविधान संशोधन बिलों का समर्थन करने की अपील की है। सरकार का मानना है कि महिलाओं के सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए यह कदम अनिवार्य है। यह न केवल संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाएगा, बल्कि नीति-निर्माण प्रक्रियाओं में उनकी समझ और दृष्टिकोण को भी शामिल करेगा, जिससे एक अधिक समावेशी, संतुलित और प्रगतिशील समाज का निर्माण होगा। यह पहल भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने और लैंगिक समानता के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

Shyam Dwivedi
लेखक के बारे में
पत्रकार वह व्यक्ति होता है जो समाचार, घटनाओं, और मुद्दों की जानकारी देता है, उनकी जांच करता है, और उन्हें विभिन्न माध्यमों जैसे अखबार, टीवी, रेडियो, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुत करता है। मेरा नाम श्याम बिहारी द्विवेदी है और मैं पिछले 7 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। मुझे डिजिटल से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव है। View all posts by Shyam Dwivedi
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