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विभाजन की गुत्थी पर NCERT का नया मॉड्यूल, जिन्ना-कांग्रेस और माउंटबेटन को बताया जिम्मेदार

Written by:Vijay Choudhary
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नए मॉड्यूल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी भी है।
विभाजन की गुत्थी पर NCERT का नया मॉड्यूल, जिन्ना-कांग्रेस और माउंटबेटन को बताया जिम्मेदार

भारत के इतिहास में 1947 का विभाजन एक ऐसा दर्दनाक मोड़ है, जिसने न सिर्फ भूगोल बदला, बल्कि करोड़ों जिंदगियों को तहस-नहस कर दिया। लाखों लोग अपने घर-बार से उजड़ गए, हजारों परिवार बिछड़ गए और लाखों निर्दोषों की जान चली गई। आजादी का जश्न मनाने के साथ ही विभाजन का जख्म भी देश की आत्मा को चीरता रहा। यही कारण है कि आजादी के 78 साल बाद भी उस दौर की कराह और यादें समाज की स्मृति में गूंजती हैं। इसी सिलसिले को नई पीढ़ी तक सही परिप्रेक्ष्य में पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर एक विशेष शैक्षिक मॉड्यूल जारी किया है।

मॉड्यूल की संरचना और उद्देश्य

नए मॉड्यूल का शीर्षक है – “विभाजन के अपराधी”। इसे दो अलग-अलग स्तरों पर तैयार किया गया है। पहला भाग कक्षा 6 से 8 के लिए, दूसरा भाग कक्षा 9 से 12 के लिए। यह मॉड्यूल किसी भी अनिवार्य पाठ्यपुस्तक का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि इसे पूरक शैक्षणिक सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को इतिहास सिर्फ रटाने के बजाय उन्हें सोचने और महसूस करने के लिए प्रेरित करना है। इसमें पढ़ाई को रोचक और भागीदारीपूर्ण बनाने के लिए कई रचनात्मक तरीके शामिल किए गए हैं। जिसमें पोस्टर बनाना,निबंध लेखन,
रोल-प्ले,बहस और समूह चर्चा होगा। यानी छात्र केवल पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि अपने विचारों और अभिव्यक्ति के जरिए उस दौर के इतिहास को जी भी पाएंगे।

किसे ठहराया गया जिम्मेदार?

इस मॉड्यूल में विभाजन को केवल एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक ऐसा फैसला बताया गया है जिसने करोड़ों लोगों के जीवन और सपनों को तोड़ दिया। इसमें मुख्य रूप से तीन पक्षों को जिम्मेदार ठहराया गया है – पहला मुहम्मद अली जिन्ना, जिन्होंने पाकिस्तान की मांग को पहली बार आगे बढ़ाया और हिंदू-मुस्लिम विभाजन की राजनीति को मजबूत किया। दूसरा कांग्रेस, जिसने अंततः इस मांग को स्वीकार कर लिया और परिस्थितियों के दबाव में विभाजन की राह पर सहमति जताई। तीसरा लॉर्ड माउंटबेटन , तत्कालीन भारत के आखिरी वायसराय, जिनके हाथों विभाजन लागू हुआ। मॉड्यूल यह भी रेखांकित करता है कि विभाजन किसी एक पक्ष की जीत नहीं थी, बल्कि एक ऐसा त्रासदीपूर्ण फैसला, जिसने देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक संरचना को गहरी चोट पहुंचाई।

नेहरू का भाषण और विभाजन की सच्चाई

इस मॉड्यूल में पंडित जवाहरलाल नेहरू का जुलाई 1947 का ऐतिहासिक भाषण भी शामिल किया गया है। उन्होंने कहा था कि- “विभाजन बुरा है, लेकिन एकता की कीमत चाहे जो भी हो, गृहयुद्ध की कीमत उससे कहीं ज्यादा होगी।” यह कथन उस समय की परिस्थितियों और मजबूरियों को उजागर करता है। देश एक ओर आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था, वहीं दूसरी ओर खून-खराबे और विस्थापन के दर्द से गुजर रहा था। मॉड्यूल में विभाजन की भयावह तस्वीर भी पेश की गई है , जिसमें लगभग 6 लाख लोगों की मौत हुई, करीब 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए, पंजाब और बंगाल जैसे समृद्ध प्रांतों की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई, जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता बढ़ी, जिसने आगे चलकर आतंकवाद का रूप ले लिया।

क्यों जरूरी है यह मॉड्यूल?

इस शैक्षिक मॉड्यूल का उद्देश्य सिर्फ तथ्यों को पढ़ाना नहीं है, बल्कि छात्रों को यह एहसास कराना है कि कठिन फैसले किस तरह आने वाली पीढ़ियों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं। जब छात्र रोल-प्ले, बहस या समूह चर्चा करेंगे, तो वे समझ पाएंगे कि नेताओं के सामने उस समय कितनी गंभीर चुनौतियां थीं। साथ ही, यह भी सीखेंगे कि एक गलत राजनीतिक फैसला कितनी पीढ़ियों तक जख्म छोड़ सकता है। यह पहल नई पीढ़ी को इतिहास की गहराई से समझने, उस पर विचार करने और उससे सबक लेने का अवसर देगी।

NCERT का यह मॉड्यूल न केवल विभाजन की घटनाओं को छात्रों तक ले जाएगा, बल्कि उन्हें संवेदनशील और चिंतनशील भी बनाएगा। विभाजन की यह गुत्थी केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आज भी देश की सामूहिक स्मृति और राजनीति को प्रभावित करती है। नए मॉड्यूल के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी भी है।

Vijay Choudhary
लेखक के बारे में
पछले पांच सालों से डिजिटल पत्रकार हैं. जुनूनी न्यूज राइटर हैं. तीखे विश्लेषण के साथ तेज ब्रेकिंग करने में माहिर हैं. देश की राजनीति और खेल की खबरों पर पैनी नजर रहती है. View all posts by Vijay Choudhary
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