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New Labor Codes: 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं नए नियम!, जानिए सैलरी, ओवरटाइम, पीएफ और ग्रेच्युटी पर क्या पड़ेगा असर?

Written by:Pooja Khodani
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New Labour Code: 1 अप्रैल 2026 से केंद्र सरकार के 4 नए लेबर कोड लागू होने जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों की सैलरी, ओवरटाइम, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं।
New Labor Codes: 1 अप्रैल से लागू होने जा रहे हैं नए नियम!, जानिए सैलरी, ओवरटाइम, पीएफ और ग्रेच्युटी पर क्या पड़ेगा असर?

प्राइवेट कर्मचारियों और श्रमिकों के लिए महत्पूर्ण खबर है। 1 अप्रैल 2026 से नए श्रम कानून (New Labour Codes) लागू होने जा रहेे हैं। इनका सीधा असर कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी, मेडिकल सुविधा, छुट्टी, सामाजिक सुरक्षा, ग्रेच्युेटी व पीएफ पीएफ (PF) कंट्रीब्यूशन और वर्किंग ऑवर पर पड़ेगा।

दरअसल, बीते साल नवंबर 2025 में केन्द्र की मोदी सरकार ने 29 श्रम कानूनों को खत्म करते हुए 4 नए श्रम कानून तैयार किए थे जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होने है। चार कानूनों में श्रम संहिताओं- वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्‍यवसायिक सुरक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और कार्य शर्त संहिता 2020 शामिल है। इसमें वेतन संहिता (Wage Code) के तहत सैलरी और बोनस से जुड़े नियम तय होंगे। सामाजिक सुरक्षा संहिता (Social Security Code) पेंशन, पीएफ और बीमा पर असर डालेंगे।

आइए जानते हैं NEW LABOUR CODES से क्या-क्या बदलेगा

सैलरी स्ट्रक्चर: ​नए नियमों के तहत आपकी ‘बेसिक सैलरी’ (Basic Pay) आपके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी चाहिए। चूंकि पीएफ बेसिक सैलरी पर कटता है, इसलिए आपके रिटायरमेंट फंड (PF) में जमा होने वाली राशि बढ़ जाएगी। हालांकि पीएफ का हिस्सा बढ़ने के कारण हर महीने मिलने वाली सैलरी (Take-home pay) थोड़ी कम हो सकती है। HRA में से घटने वाला हिस्सा भी बढ़ेगा

वर्किंग आवर्स:  काम के घंटों पर असर पड़ेगा। काम के घंटे हर दिन 8-12 घंटे और हर हफ्ते 48 घंटे तय किए गए हैं। कंपनियां चाहें तो हफ्ते में 4 दिन काम और 3 दिन छुट्टी का मॉडल अपना सकती हैं। यदि हफ्ते में 4 दिन काम होता है, तो कर्मचारी को प्रतिदिन 12 घंटे काम करना होगा, ताकि हफ्ते के कुल 48 घंटे पूरे हो सकें। 15 मिनट से ज्यादा अतिरिक्त काम करने पर उसे 30 मिनट का ओवरटाइम माना जाएगा। वर्तमान में यह सीमा 30 मिनट की है। ओवरटाइम तय घंटों से अधिक काम, कर्मचारी की सहमति से होगा

सामाजिक दायरा: नए कोड के तहत असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और स्वरोजगार करने वाले लोगों को भी शामिल किया जाएगा नए नियम के बाद कर्मचारी साल के अंत में 30 दिन से ज्यादा की बची हुई छुट्टियों को ‘एनकैश’ (पैसे में बदलना) करा सकेंगे। सामाजिक सुरक्षा लाभ की गारंटी के लिए नियुक्ति अनिवार्य पत्र जरूरी है। सभी के लिए प्रोविडेंट फंड, पेंशन और बीमा के लाभ सुनिश्चित किए गए हैं। 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच की सुविधा मिलेगी।

ग्रेच्युटी: नए लेबर कोड के लागू होने से अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ पाने के लिए 5 साल तक का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि मात्र 1 साल की नौकरी पूरी करने पर भी वे इसके हकदार हो जाएंगे।

नौकरी छोड़ने पर 48 घंटे में पूरा बकाया: नए नियम के तहत ​नौकरी छोड़ने, हटाए जाने या इस्तीफा देने की स्थिति में कंपनी को अब 48 घंटे के भीतर कर्मचारी का पूरा बकाया चुकाना होगा। अभी इसमें आमतौर पर 30 से 90 दिन का समय लगता है।

महिलाओं के लिए: नए कानून में महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाएं अब रात की शिफ्ट (शाम 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच) में काम कर सकेंगी, बशर्ते कंपनी उनकी सुरक्षा और आने-जाने की पूरी व्यवस्था करे। इसके लिए महिला की सहमति भी जरूरी होगी।

Pooja Khodani
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खबर वह होती है जिसे कोई दबाना चाहता है। बाकी सब विज्ञापन है। मकसद तय करना दम की बात है। मायने यह रखता है कि हम क्या छापते हैं और क्या नहीं छापते। (पत्रकारिता में 12 वर्षों से सक्रिय, इलेक्ट्रानिक से लेकर डिजिटल मीडिया तक का अनुभव, सीखने की लालसा के साथ हर खबर पर पैनी नजर) View all posts by Pooja Khodani
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