लोकसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने साफ संदेश दिया कि अब नक्सली हिंसा करने वालों के दिन लद गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है: नक्सली हथियार डाल दें, नहीं तो गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा। शाह ने बताया कि पिछले तीन सालों में सुरक्षाबलों ने 706 नक्सलियों को मुठभेड़ में मार गिराया है, जबकि 2024 से 2026 के बीच 4839 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इस दौरान 2208 नक्सलियों को जेल भेजा गया है।
‘नक्सल मुक्त भारत’ पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश लंबे समय से नक्सलवाद से जूझ रहा था, लेकिन अब हम इसे पूरी तरह खत्म करने की बात कर रहे हैं। शाह ने दावा किया कि देश के 12 राज्य कभी नक्सलवाद से पीड़ित थे, जहां वामपंथी विचारधारा से यह समस्या फैली, लेकिन अब बस्तर जैसे क्षेत्रों से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि बस्तर के हर गांव में स्कूल बनाए गए हैं और विकास को रोका नहीं जा सकता।
विपक्ष पर शाह का तीखा हमला
शाह ने विपक्ष पर नक्सलियों को लेकर सहानुभूति रखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के लिए विपक्ष को दर्द हो रहा है, जबकि आदिवासियों के विकास को लेकर कांग्रेस को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने आदिवासियों का विकास नहीं किया, और यह जनता का साथ ही है जिससे नक्सलवाद खत्म हुआ।
केंद्रीय मंत्री ने नक्सलवादी विचार को “सत्ता बंदूक से निकलती है” के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश नक्सलवाद मुक्त हुआ है, क्योंकि नक्सलवाद का विकास से कोई मतलब नहीं है। शाह ने बताया कि नक्सली अपने ही लोगों का खून बहाते हैं और आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथ में हथियार थमाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वामपंथी उग्रवाद को खत्म करने में जनता का भरपूर सहयोग मिला है।
शाह ने नक्सलवाद फैलने के पीछे गरीबी के तर्क को खारिज किया। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के आदर्श माओ हैं और वे आदिवासियों को माओ को अपना आदर्श मानने के लिए प्रेरित करते थे। गृह मंत्री ने कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि ‘रेड कॉरिडोर’ में नक्सलवाद के चलते गरीबी आई, क्योंकि आदिवासियों को पढ़ने से रोकने के लिए स्कूल जला दिए गए।
अमित शाह से कांग्रेस से पूछा सवाल
शाह ने कांग्रेस पर सीधा सवाल दागा: “मैं पूछना चाहता हूं कि 75 साल में 60 साल तो शासन आपने किया, आदिवासी अभी तक विकास से क्यों महरूम रहे?” उन्होंने कहा कि आदिवासियों का विकास अब मोदी सरकार कर रही है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 60 साल तक आदिवासियों को घर, पानी, स्कूल और बैंक की सुविधाएं नहीं दीं, इसलिए उन्हें खुद देखना चाहिए कि असली दोषी कौन है।
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में माओवादी विचारधारा फैली। उन्होंने इंदिरा गांधी के राजनीतिक स्वार्थ को 1970 के दशक में नक्सलबाड़ी से शुरू हुए नक्सलवाद के प्रसार का कारण बताया। शाह ने यह भी कहा कि ‘सलवा जुडूम’ की शुरुआत एक कांग्रेस नेता ने ही की थी, और नक्सलियों ने कांग्रेस नेता कर्मा की हत्या की। उन्होंने बताया कि 1970 से 2004 के बीच नक्सलवाद देश में फैला, जबकि समस्या का समाधान बातचीत से निकलता है, हथियार से नहीं। शाह ने यह भी बताया कि नक्सलियों के पास ज्यादातर हथियार पुलिस से लूटे हुए हैं।
नक्सलवाद के खिलाफ मोदी सरकार की रणनीति
अमित शाह ने नक्सली हिंसा करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि उनके दिन अब खत्म हो गए हैं। उन्होंने दोहराया कि सरकार 50 बार कह चुकी है कि नक्सली हथियार डाल दें, अन्यथा गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा। गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान को कोई चुनौती नहीं दे सकता और बंदूक चलाने वालों से अब कोई बात नहीं होगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो हथियार डालेंगे, सरकार उनकी मदद करेगी। शाह ने नक्सलियों से लड़ते हुए शहीद हुए 5000 जवानों की शहादत को भी याद किया और ‘अर्बन नक्सलियों’ को मानवता का दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक इच्छाशक्ति से ही नक्सलवाद को खत्म किया गया है और मोदी सरकार ने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।
शाह ने सीपीआई (एमएल) को आज के नक्सली बताते हुए कहा कि इनका मकसद विकास नहीं है, और इनकी विचारधारा दूसरे देश से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए गए हैं। इन क्षेत्रों में 20 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए, 12500 किलोमीटर सड़कें बनीं और 5000 मोबाइल टावर लगाए गए। गृह मंत्री ने छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर नक्सलियों को बचाने का आरोप भी लगाया, जिससे नक्सलवाद खत्म होने में देरी हुई। उन्होंने अंत में दोहराया कि तीन साल में 706 नक्सली मारे गए, 4839 ने सरेंडर किया और 2208 जेल गए, यह साफ करता है कि नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद चुके हैं।






