सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने एससी में महिला जजों की कम प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई है। एससीबीए ने बताया कि 2021 के बाद से सुप्रीम कोर्ट में कोई महिला जज नियुक्त नहीं हुई है, जो लैंगिक समानता और विविधता के लिए एक बड़ा सवाल उठाता है। एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेने और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की मांग की है।
एससीबीए के अध्यक्ष ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति में पारदर्शिता और समावेशिता की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की स्वीकृत संख्या है, लेकिन महिला जजों की अनुपस्थिति एक असंतुलन को दर्शाती है। यह मुद्दा न केवल लैंगिक समानता के लिए बल्कि न्यायिक प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कॉलेजियम सिस्टम में सुधार
एससीबीए ने यह भी मांग की कि कॉलेजियम प्रणाली में सुधार किया जाए ताकि योग्य महिला जजों को उचित अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट और निचली अदालतों में कई योग्य महिला जज हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए विचार किया जाना चाहिए। इसके लिए एक पारदर्शी और समावेशी प्रक्रिया को अपनाने की जरूरत है।
त्वरित कदम उठाने का आग्रह
इसके अलावा, एससीबीए ने सरकार और न्यायपालिका से इस दिशा में त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया है। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की नियुक्ति न केवल लैंगिक समानता को बढ़ावा देगी, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को न्यायिक प्रक्रिया में बेहतर प्रतिनिधित्व भी प्रदान करेगी।






