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मनासा में नृसिंह जयंती की धूम: कोठी फोड़ लीला में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजे जयकारे

Written by:Bhawna Choubey
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नीमच के मनासा में नृसिंह जयंती पर कोठी फोड़ लीला का भव्य आयोजन हुआ। बद्री विशाल मंदिर में हजारों श्रद्धालु जुटे, जैसे ही कोठी टूटी, जयकारों से गूंज उठा पूरा परिसर और भक्तों में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।
मनासा में नृसिंह जयंती की धूम: कोठी फोड़ लीला में उमड़ा आस्था का सैलाब, गूंजे जयकारे

मध्य प्रदेश के नीमच जिले का छोटा सा कस्बा मनासा हर साल नृसिंह जयंती पर कुछ ऐसा देखता है, जो इसे खास बना देता है। जैसे ही यह दिन आता है, पूरा शहर भक्ति में डूब जाता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब बद्री विशाल मंदिर में कोठी फोड़ लीला का आयोजन हुआ और हजारों श्रद्धालु वहां पहुंच गए।

शाम की गोधूलि बेला में जब मंदिर परिसर में यह लीला शुरू हुई, तो हर किसी की नजर उस क्षण पर टिकी थी, जब भगवान नृसिंह का प्रकट होना दिखाया जाएगा। जैसे ही तय समय पर कोठी टूटी, पूरा माहौल जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं की आस्था अपने चरम पर पहुंच गई।

नृसिंह जयंती पर कोठी फोड़ लीला का अद्भुत दृश्य

मनासा में नृसिंह जयंती के मौके पर होने वाली कोठी फोड़ लीला वर्षों पुरानी परंपरा है। इस आयोजन को देखने के लिए हर साल दूर-दूर से लोग आते हैं। इस बार भी बद्री विशाल मंदिर में शाम करीब 6 बजकर 55 मिनट पर जैसे ही कोठी फोड़ी गई, वहां मौजूद हजारों श्रद्धालुओं ने “जय नृसिंह भगवान” के जयकारे लगाने शुरू कर दिए।

यह दृश्य इतना भव्य और भावुक होता है कि हर कोई इसमें डूब जाता है। लोग मानते हैं कि इस लीला के दर्शन करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही कारण है कि हर साल यहां भीड़ बढ़ती जा रही है।

पौराणिक कथा से जुड़ी है कोठी फोड़ लीला

नृसिंह जयंती पर होने वाली यह कोठी फोड़ लीला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि पौराणिक कथा का जीवंत रूप है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए नृसिंह अवतार लिया था और खंभे को चीरकर प्रकट हुए थे।

इसी घटना को मनासा में कोठी फोड़ लीला के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जब कोठी टूटती है, तो यह उस पौराणिक क्षण का प्रतीक होता है, जब भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे। यही वजह है कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास और आस्था से जुड़ा हुआ होता है।

बरसों पुरानी परंपरा, आज भी कायम

मनासा की यह कोठी फोड़ लीला कोई नई परंपरा नहीं है, बल्कि यह कई पीढ़ियों से चली आ रही है। बद्री विशाल मंदिर के पुजारियों के अनुसार यह परंपरा वर्षों पुरानी है और हर साल इसे पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ निभाया जाता है।

कहा जाता है कि दुनिया में शायद ही कहीं और इस तरह नृसिंह अवतार का इतना जीवंत मंचन होता हो। यही कारण है कि मनासा की यह परंपरा पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए लोग खास तौर पर यहां आते हैं।

सुबह से शुरू हो जाता है भक्ति का माहौल

नृसिंह जयंती के दिन मनासा में सुबह से ही मंदिर में पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन शुरू हो जाता है। लोग परिवार के साथ मंदिर पहुंचते हैं और भगवान के दर्शन करते हैं। जैसे-जैसे दिन ढलता है, मंदिर परिसर में भीड़ बढ़ने लगती है।

शाम तक हालात ऐसे हो जाते हैं कि मंदिर और आसपास की सड़कें पूरी तरह भक्तों से भर जाती हैं। हर कोई इस खास पल का इंतजार करता है, जब कोठी फोड़ लीला का मंचन होगा।

प्रशासन की सख्त व्यवस्था, सुरक्षित रहा आयोजन

इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने भी पुख्ता इंतजाम किए थे। मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो।

आयोजन के दौरान पूरी व्यवस्था पर नजर रखी गई और कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया और लोगों ने भगवान का आशीर्वाद लिया।

Bhawna Choubey
लेखक के बारे में
मुझे लगता है कि कलम में बहुत ताकत होती है और खबरें हमेशा सच सामने लाती हैं। इसी सच्चाई को सीखने और समझने के लिए मैं रोज़ाना पत्रकारिता के नए पहलुओं को सीखती हूँ। View all posts by Bhawna Choubey
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