मध्य प्रदेश की राजनीति में इस समय ‘लूडो’ पर बयानबाजी शुरू हो गई है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कुछ सांसदों पर तंज कसा और कहा कि जनता की आवाज बनने गए थे लेकिन मौन बनकर बैठे हैं! क्या संसद में जनता ने इन्हें ‘लूडो’ खेलने भेजा था? जीतू पटवारी का आरोप है कि इन सांसदों द्वारा संसद में जनता के मुद्दे नहीं उठाए जाते हैं। अब पीसीसी चीफ के इस बयान पर मंदसौर-नीमच क्षेत्र के भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने तीखा पलटवार किया है।
भाजपा सांसद सुधीर गुप्ता ने जीतू पटवारी के ‘लूडो’ वाले तंज पर जवाब देते हुए उनको इसके मनोवैज्ञानिक फायदे तक गिना दिए। इतना ही नहीं भाजपा सांसद ने पीसीसी चीफ को पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ ‘लूडो’ खेलने की नसीहत तक दे डाली। साथ ही कहा कि वे लोकसभा में जनता की आवाज और मुद्दों को हमेशा रखते आए हैं। इस पूरे मामले ने मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई बहस और चर्चा को जन्म दे दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, रविवार, 26 अप्रैल 2026 को पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर भाजपा के कुछ सांसदों पर निशाना साधा है। उन्होंंने कहा कि आवाज बनने गए थे… मौन बनकर बैठे हैं! मध्य प्रदेश की जनता ने जिन भाजपा सांसदों को अपनी आवाज़ बनाकर संसद में भेजा, वे सालों से मौन व्रत साधे बैठे हैं। जब प्रदेश में किसान लुट रहा है, युवा बेरोजगार है, महिलाएं असुरक्षित हैं, दलित और आदिवासी न्याय के लिए भटक रहे हैं, तब ये भाजपा के सांसद सदन में खामोश क्यों बैठे हैं? क्या संसद में जनता ने इन्हें ‘लूडो’ खेलने भेजा था?
जीतू पटवारी को नहीं है संसद के प्रोटेकॉल का ध्यान- भाजपा सांसद
भाजपा सांसद ने कहा कि जीतू पटवारी को संसदीय कार्यों का पूर्ण ज्ञान नहीं है और सदन के प्रोटेकॉल का भी ध्यान नहीं है। उन्होंंने कहा कि जब संसद में जाते हैं राहुल गांधी जैसे लोग सीढ़ियों पर बैठकर कचौरी-समोसे खा लेते हैं। जो संसदीय मर्यादाओं के खिलाफ है। संसद में कैसे बैठना और व्यवहार करना इसका भी ज्ञान नहीं होता है। लेकिन आज जीतू पटवारी दूसरों को ज्ञान परोस रहे हैं।
सुधीर गुप्ता ने बताया कि संसद में अपनी चीजों को उठाने के बहुत सारे तरीके होते हैं, प्रश्नकाल और डिबेट जैसे कई उचित मंच हैं, लेकिन विपक्ष केवल हंगामा करता है, बोलने नहीं देता और वॉकआउट कर जाता है। अपनी सक्रियता का हवाला देते हुए सांसद ने कहा कि उन्होंने अपने संसदीय कार्यकाल में लोकसभा में सर्वाधिक प्रश्न लगाए हैं और क्षेत्र के मुद्दों को मुखरता से उठाया है।
भाजपा सांसद ने गिनाए ‘लूडो’ के फायदे
भाजपा सांसद ने कहा कि जीतू पटवारी को ‘लूडो’ से नफरत है। शायद वह कभी लूडो खेले नहीं हैं। इसलिए लूडो की कुछ चीजें है जो मैं बताना चाहता हूं। भाजपा सांसद ने कहा कि लूडो मनोरंजन का खेल नहीं है। उन्होंने लूडो को ‘ब्रेन एक्टिवेशन’ का खेल बताते हुए कहा कि इससे निर्णय क्षमता (Decision Making), रणनीतिक सोच और धैर्य का विकास होता है। पासे के अंकों से बेसिक गणित और एकाग्रता (Concentration) बढ़ती है। इतना ही नहीं परिवार वालों के साथ लूडो खेलने से तनाव नहीं होता। दिमाग एकदम रिलेक्स होता है। वहीं दोस्तों एवं अन्य लोगों के साथ बैठकर खेलने से रिश्ते मजबूत होते हैं।
शिवराज वाले ‘गलत बोरी कांड’ की दिलाई याद
भाजपा सांसद ने एक पुराने किस्से का जिक्र करते हुए कहा कि एकाग्रता के अभाव के कारण ही जब जीतू पटवारी पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के निवास पर गए थे, तो किसानों द्वारा दी गई बोरी की जगह कोई और सी गलत बोरी उठाकर ले आए थे। सांसद ने चुटकी लेते हुए कहा कि लूडो खेलने से पटवारी की एकाग्रता में जरूर सुधार आएगा।
अंत में भाजपा सांसद सुधीर ने पीसीसी चीफ को यह हिदायत भी दी कि कांग्रेस पार्टी अपनी स्थिति पर ध्यान दे और वे लूडो जरूर खेलें, लेकिन इसे पैसों से खेलकर जुए (Gambling) में न बदलें।
“आवाज़ बनने गए थे… मौन बनकर बैठे हैं!”
मध्य प्रदेश की जनता ने जिन भाजपा सांसदों को अपनी आवाज़ बनाकर संसद में भेजा, वे सालों से मौन व्रत साधे बैठे हैं।
जब प्रदेश में किसान लुट रहा है, युवा बेरोजगार है, महिलाएं असुरक्षित हैं, दलित और आदिवासी न्याय के लिए भटक रहे हैं, तब ये भाजपा… pic.twitter.com/SsiIWqv3cB
— Jitendra (Jitu) Patwari (@jitupatwari) April 26, 2026






