कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद अब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दरअसल असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा की पत्नी पर दिए बयान को लेकर दर्ज केस में कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया है। वहीं अब इस केस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे की दिशा तय करेगा। बता दें कि इस पूरे मामले की शुरुआत चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। दरअसल पवन खेड़ा ने हिमन्त बिश्व शर्मा की पत्नी पर कई देशों के पासपोर्ट रखने और विदेशों में संपत्ति होने के आरोप लगाए थे।
वहीं इसके बाद असम में उनके खिलाफ जालसाजी और मानहानि के तहत केस दर्ज किया गया। वहीं हाईकोर्ट ने इस बयान को सिर्फ राजनीतिक आरोप नहीं, बल्कि गंभीर साजिश के तौर पर देखा, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
हाईकोर्ट का रुख सख्त
दरअसल गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि यह सिर्फ बयानबाजी का मामला नहीं है बल्कि इसमें सुनियोजित साजिश के संकेत मिलते हैं। यही वजह है कि अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए हिरासत में पूछताछ को जरूरी बताया है। वहीं इससे पहले उन्हें तेलंगाना हाईकोर्ट से ट्रांजिट बेल मिली थी लेकिन उस पर भी रोक लग गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट में उनकी याचिका पर फैसला तय करेगा कि उन्हें गिरफ्तारी से राहत मिलती है या नहीं। अगर सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो गिरफ्तारी की संभावना बढ़ सकती है।
जानिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल यह विवाद उस समय बढ़ा जब पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमन्त बिश्व शर्मा की पत्नी के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में बड़ी संपत्ति भी है। वहीं इन आरोपों को गंभीर मानते हुए हिमन्त बिश्व शर्मा और उनके परिवार की ओर से कानूनी कार्रवाई की गई। वहीं इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ कांग्रेस पार्टी अपने नेता के समर्थन में खड़ी है और इसे राजनीतिक दबाव बता रही है, वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ पक्ष इसे झूठे आरोप और बदनाम करने की कोशिश बता रहा है।






