
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘चिन्मय अमृत महोत्सव’ में शामिल हुए। वहीं कार्यक्रम में उन्होंने आधुनिक 3D तकनीक यानी होलोग्राम के जरिए स्वामी चिन्मयानंद से बातचीत की। इस खास प्रस्तुति में स्वामीजी के होलोग्राम ने 1993 में शिकागो में हुई मुलाकात का जिक्र किया जिस पर पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें दोबारा गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला। चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर आयोजित यह तीन दिन का कार्यक्रम 23 से 25 अक्टूबर तक चलेगा जिसमें देश-विदेश से 9 हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
दरअसल दिल्ली के भारत मंडपम में हुए इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के विचारों, गीता के ज्ञान और भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने में चिन्मय मिशन के योगदान पर बात की। उन्होंने कहा कि स्वामीजी ने गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया था। आज मिशन के स्कूलों और दूसरे केंद्रों के जरिए यह काम आगे बढ़ रहा है। कार्यक्रम में तकनीक के इस्तेमाल के जरिए स्वामीजी के होलोग्राम को सामने लाया गया जिससे पीएम मोदी ने बातचीत की। यह प्रस्तुति कार्यक्रम के खास आकर्षणों में शामिल रही।
पीएम मोदी और स्वामी चिन्मयानंद के बीच हुई बातचीत
वहीं कार्यक्रम के दौरान स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम ने पीएम मोदी से कहा कि उनकी पहली मुलाकात फरवरी 1993 में हुई थी। उस समय मोदी उन्हें अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद के शताब्दी कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता देने पहुंचे थे। इसके जवाब में पीएम मोदी ने कहा कि वह खुशनसीब हैं कि उन्हें दोबारा गुरुदेव के दर्शन का सौभाग्य मिला। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में उस मुलाकात को भी याद किया। उन्होंने बताया कि स्वामीजी को आमंत्रित करने के बाद वह अमेरिका गए थे और गुरुदेव ने लोगों को कार्यक्रम के बारे में जागरूक किया था। मोदी ने स्वामी चिन्मयानंद के निधन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय उनकी कमी सभी को महसूस हुई थी।
इस प्रस्तुति में होलोग्राम तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से किसी व्यक्ति की ऐसी 3D तस्वीर दिखाई जा सकती है जो अलग-अलग कोण से देखने पर वास्तविक व्यक्ति जैसी नजर आती है। कार्यक्रम में इसी तकनीक के जरिए स्वामीजी की मौजूदगी का अनुभव कराया गया। पीएम मोदी ने कहा कि चिन्मय एक विचार है जिसकी शुरुआत एक चिन्मय ऋषि ने की थी। उन्होंने यह भी कहा कि जो चिन्मय है, वह अमर है।
चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे
स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती ने साल 1951 में चिन्मय मिशन की शुरुआत की थी। इसका मकसद भगवद्गीता, उपनिषद और वेदांत की सीख को आम लोगों तक आसान तरीके से पहुंचाना था। मिशन के जरिए आध्यात्मिक अध्ययन, सत्संग, बच्चों और युवाओं के कार्यक्रमों के साथ शिक्षा और सामाजिक सेवा से जुड़े काम भी किए जाते हैं। मिशन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक दुनिया के अलग-अलग देशों में इसके 350 से ज्यादा केंद्र और 1000 से अधिक आध्यात्मिक अध्ययन समूह हैं। भारत में इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। मिशन के शैक्षणिक नेटवर्क में 80 से ज्यादा चिन्मय विद्यालय और कई कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों में पढ़ाई के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारों से भी परिचित कराया जाता है।
चिन्मय मिशन के 75 साल पूरे होने के मौके पर सालभर अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस उत्सव की शुरुआत पिछले साल हुई थी। इस दौरान तमिलनाडु में संगीतकार इलैयाराजा के संगीत वाली तमिल भगवद्गीता जारी की गई थी। इसके अलावा कई जगहों पर हवन, त्रिपुरा में मां सौंदर्या चिन्मयी मंदिर की स्थापना और गीता पाठ जैसे आयोजन हुए। एक ऑनलाइन कार्यक्रम में दुनिया भर से एक लाख से ज्यादा लोगों ने एक साथ भगवद्गीता के 15वें अध्याय का पाठ किया था।
पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति का जिक्र किया
वहीं पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने गीता के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत की थी। आज इसी अभियान से जुड़े प्रयासों के जरिए युवा भारतीय संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके प्रयासों के केंद्र में देश के युवा रहे हैं। मोदी ने स्वामीजी की याद में साल 2015 में सिक्का जारी करने का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि स्वामी चिन्मयानंद के गुरु ने उन्हें ‘गो, रोर लाइक अ लॉयन’ यानी शेर की तरह दहाड़ने का संदेश दिया था। पीएम ने कहा कि महान लोगों के काम उनके जाने के बाद भी जारी रहते हैं और चिन्मय मिशन इसका उदाहरण है।
वहीं शिक्षा के मुद्दे पर पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि साल 2020 में लाई गई नई शिक्षा नीति में संस्कृति के साथ तकनीक की शिक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। उन्होंने चिन्मय मिशन के स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थानों के जरिए बच्चों को शिक्षित करने का काम जारी है।

