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PM Modi ने की ओम बिरला की सराहना, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद दिए वक्तव्य को बताया संसदीय परंपरा, लोकतांत्रिक मर्यादा की सधी हुई व्याख्या

Written by:Atul Saxena
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देश ये देखकर दुखी होता है कि परिवारवादी और सामंती सोच रखने वाले कुछ लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं को भी अपने सीमित दायरे में देखना चाहते हैं। वे किसी नए व्यक्ति को आगे आते हुए सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते।
PM Modi ने की ओम बिरला की सराहना, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद दिए वक्तव्य को बताया संसदीय परंपरा, लोकतांत्रिक मर्यादा की सधी हुई व्याख्या

PM Modi Om Birla

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला  को पत्र लिखकर सदन में उनकी गरिमापूर्ण भूमिका और लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति उनके समर्पण की सराहना की है। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, “लोकसभा में आपके विरुद्ध लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में खारिज हो गया। जिस प्रकार सदन ने स्पष्ट रूप से इस राजनीतिक कुकृत्य को अस्वीकार किया, इसके लिए मैं सदन के सदस्यों को भी बधाई देता हूं।

मोदी ने लिखा  “अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के बाद आपने सदन में जो वक्तव्य दिया, उसे मैंने ध्यानपूर्वक सुना। आपने जिस संतुलन, धैर्य और स्पष्टता के साथ संसदीय इतिहास, अध्यक्ष के दायित्व और नियमों की सर्वोच्चता का उल्लेख किया, वह अत्यंत प्रभावशाली है। इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं। “आपका वक्तव्य केवल उस क्षण का उत्तर नहीं है, बल्कि भारतीय संसदीय परंपरा और लोकतांत्रिक मर्यादा की एक गहरी और सधी हुई व्याख्या भी है।

“भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी संवैधानिक संस्थाएं हैं। संसद इन संस्थाओं का सर्वोच्च मंच है। इस सदन में व्यक्त होने वाली हर आवाज देश के करोड़ों नागरिकों की आशाओं और अपेक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष का दायित्व केवल कार्यवाही संचालित करने का नहीं होता, बल्कि वह लोकतांत्रिक परंपराओं, नियमों और संस्थागत गरिमा का संरक्षक भी होता है। आपने अपने वक्तव्य में जिस स्पष्टता के साथ कहा कि इस सदन में कोई भी नियमों से ऊपर नहीं है, वह हमारे लोकतंत्र की मूल भावना को पुनः स्थापित करने वाला संदेश है।”

विचारों की विविधता ही लोकतंत्र को जीवंत बनाती है

“लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं। विचारों की विविधता ही लोकतंत्र को जीवंत बनाती है। लेकिन यह भी उतना ही सत्य है कि असहमति और असम्मान के बीच एक स्पष्ट अंतर होता है। लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं में विश्वास रखने वाले सभी लोगों के लिए यह चिंता का विषय है कि कभी-कभी राजनीतिक असहमति, संसदीय मर्यादा के प्रति अनादर में बदलती दिखाई देती है। ऐसे क्षणों में आसन पर बैठे व्यक्ति की परीक्षा होती है। आपने जिस संयम, संतुलन और निष्पक्षता के साथ इन परिस्थितियों का सामना किया, वह सराहनीय है।”

अविश्वास प्रस्ताव के पीछे निजी स्वार्थ और अहंकार की भावना थी 

“लोकतांत्रिक विचारों में आस्था रखने वाले देश के हर नागरिक ने यह महसूस किया कि आपके विरुद्ध लाये गए अविश्वास प्रस्ताव के पीछे निजी स्वार्थ और अहंकार की भावना कार्य कर रही थी। इस स्थिति ने लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले हर व्यक्ति को दुखी किया। यह पहली बार नहीं है जब इस आसन को इस प्रकार की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो।”

लोकतंत्र का अर्थ ही यही है कि अवसर कुछ लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर वर्ग और हर क्षेत्र की आवाज को स्थान मिले। आपने अपनी अध्यक्षता में इस भावना को निरंतर विस्तार दिया है। विपरीत परिस्थितियों में भी आपने जिस प्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन किया है, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।

Atul Saxena
लेखक के बारे में
पत्रकारिता मेरे लिए एक मिशन है, हालाँकि आज की पत्रकारिता ना ब्रह्माण्ड के पहले पत्रकार देवर्षि नारद वाली है और ना ही गणेश शंकर विद्यार्थी वाली, फिर भी मेरा ऐसा मानना है कि यदि खबर को सिर्फ खबर ही रहने दिया जाये तो ये ही सही अर्थों में पत्रकारिता है और मैं इसी मिशन पर पिछले तीन दशकों से ज्यादा समय से लगा हुआ हूँ.... पत्रकारिता के इस भौतिकवादी युग में मेरे जीवन में कई उतार चढ़ाव आये, बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन इसके बाद भी ना मैं डरा और ना ही अपने रास्ते से हटा ....पत्रकारिता मेरे जीवन का वो हिस्सा है जिसमें सच्ची और सही ख़बरें मेरी पहचान हैं .... View all posts by Atul Saxena
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