आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है। पीएम नरेंद्र मोदी आज 75 वर्ष के हो गए। 7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और शपथ लेते ही कहा था कि मैं यहां टेस्ट मैच खेलने नहीं बल्कि वनडे खेलने आया हूं। प्रधानमंत्री द्वारा बतौर मुख्यमंत्री कर्मयोगी प्रशिक्षण शिविर शुरू किए गए और आईआईएम अहमदाबाद को मंत्रियों को प्रशिक्षित करने के लिए शामिल किया गया, जिसे राजनीति में एक नई पहल माना गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐसी कहानियां हैं जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे और अपने आप को गौरवान्वित महसूस करेंगे कि हमारे प्रधानमंत्री कैसे हैं। उनकी कहानी बेहद संघर्षपूर्ण रही है। सेवा, सादगी और प्रतीकात्मकता के मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को आकार दिया है। चलिए, आज हम आपको उनकी कुछ कहानियां बता रहे हैं।

1962 के भारत-चीन युद्ध की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बचपन से ही राष्ट्र के प्रति समर्पित रहे हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छोटी सी उम्र में मेहसाणा रेलवे स्टेशन पर सैनिकों की सेवा करने के लिए जाते थे, जबकि 1971 के पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी नरेंद्र मोदी द्वारा सैनिकों की मदद की गई। आज भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिवाली देश के सैनिकों के साथ ही मनाते हैं।

गुजरात के मोरबी में मच्छू बांध त्रासदी की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक और कहानी ऐसी है, जिससे साफ होता है कि उनका सेवा भाव कितना गहरा है। 1979 में राजनीति में आने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मोरबी में मच्छू बांध त्रासदी के दौरान राहत कार्यों में भाग लिया था। इस त्रासदी में लगभग 25,000 लोग मारे गए थे। नरेंद्र मोदी ने आरएसएस स्वयंसेवकों को संगठित किया और बिना किसी भेदभाव के शवों का अंतिम संस्कार भी किया। साथ ही गांव का पुनर्निर्माण करवाया और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की। उन्होंने इस दौरान मुस्लिम परिवारों का भी पूरा ध्यान रखा।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली

7 अक्टूबर 2001 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तो अपने शपथ ग्रहण समारोह के बाद अपने संबोधन में कहा था कि मैं यहां टेस्ट मैच खेलने नहीं आया हूं, मैं तो वनडे खेलने आया हूं। इससे उन्होंने साफ कर दिया कि वह धीरे काम नहीं करेंगे और अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहेंगे। उन्होंने सरकारी अधिकारियों के लिए कर्मयोगी प्रशिक्षण शुरू किया और मंत्रियों को शिक्षित करने का भी काम किया, जिसे भारतीय राजनीति में एक नई पहल माना जाता है।

साल 2018 की कहानी

बात साल 2018 की है, जब प्रधानमंत्री का मानवीय रूप देखने को मिला। वह सेवा-निवृत्त शिक्षिका से मिले थे। उन्होंने प्यार से उन्हें देहरादून की लीची भेंट की और उनसे लंबी बातचीत की। उन्होंने शुरुआती शिक्षण के दिनों के बारे में जाना और हाथ जोड़कर आशीर्वाद मांगा। बच्चों की जेब में चॉकलेट भी रखी। इस दिन प्रधानमंत्री का मानवीय रूप देखकर सभी लोग भावुक हो गए थे।