चंडीगढ़: प्रगतिशील पंजाब निवेशक सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया दौरे पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पंजाब के लोगों और किसानों को बड़ी उम्मीदें थीं, जो पूरी नहीं हुईं। मान ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब के वैध फंड को रोक रही है और किसानों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चुप्पी साधे हुए है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को उम्मीद थी कि केंद्रीय गृह मंत्री न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कृषि ऋणों की माफी या राज्य के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा करेंगे। हालांकि, उन्होंने अफसोस जताया कि इन महत्वपूर्ण विषयों पर कोई सार्थक चर्चा तक नहीं हुई।
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“हमें उम्मीद थी कि केंद्रीय गृह मंत्री पंजाब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, कर्ज माफी या विशेष पैकेज के बारे में बात करेंगे लेकिन इन मुद्दों पर कोई बात नहीं बढ़ी।”- भगवंत सिंह मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
फंड रोकने और नशा तस्करी पर केंद्र को घेरा
भगवंत मान ने केंद्र पर वित्तीय असहयोग का आरोप लगाते हुए कहा, “केंद्र सरकार ने पंजाब के RDF (ग्रामीण विकास निधि) और GST फंड रोक दिए हैं। प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,600 करोड़ रुपये की बाढ़ राहत राशि में से राज्य को 16 रुपये भी नहीं मिले हैं।”
नशों के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पार से होने वाली तस्करी को रोकना मुख्य रूप से केंद्र की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद, पंजाब सरकार अपने फंड से सीमा पर 550 किलोमीटर लंबी एंटी-ड्रोन तकनीक स्थापित कर रही है ताकि इस खतरे से निपटा जा सके।
“पंजाब में नफरत के बीज नहीं उगेंगे”
राजनीतिक हमला करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पंजाब की उपजाऊ मिट्टी पर फूट और नफरत की राजनीति कभी सफल नहीं होगी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि यह राज्य में एक ‘स्कूटर पार्टी’ बनकर रह गई है, जो 2027 में कांग्रेस की मदद से सत्ता में आने के सपने देख रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंजाब के लोग भाजपा की राजनीतिक फितरत से वाकिफ हैं और यहां नफरत की राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है।
किसानों और युवाओं के मुद्दे उठाए
मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 65,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं, जबकि केंद्र का दो करोड़ नौकरियों का वादा अधूरा है। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब सरकार ने किसानों के हित में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की बार-बार सिफारिश की, लेकिन केंद्र ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।