भारत में रमजान के पाक महीने का चांद बुधवार शाम को नजर आ गया है। देश के कई हिस्सों, विशेषकर बिहार और असम में सबसे पहले चांद देखे जाने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही अब यह तय हो गया है कि इस्लाम के सबसे मुकद्दस महीने का पहला रोजा (व्रत) गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। चांद के दीदार के साथ ही देशभर में खुशी का माहौल है और लोग एक-दूसरे को मुबारकबाद दे रहे हैं।
बुधवार को जैसे ही सूरज डूबा, लोगों की नजरें आसमान की ओर टिक गईं। कुछ ही देर बाद बिहार और असम से चांद दिखने की पहली खबरें आईं। इसके बाद उत्तर प्रदेश, राजस्थान समेत देश के अन्य हिस्सों से भी चांद दिखने की पुष्टि होने लगी। जयपुर में हालांकि आसमान में बादल छाए हुए थे, लेकिन लोगों की गवाही के आधार पर रुय्यत-ए-हिलाल कमेटी (चांद देखने वाली समिति) ने चांद दिखने की पुष्टि कर दी।
लखनऊ से मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने भी चांद की तस्दीक करते हुए कहा कि रमजान का चांद आसमान में नजर आया है और कल यानी गुरुवार को रमजान की पहली तारीख होगी। वहीं, पटना के इमारत-ए-शरिया के काज़ी रिजवान नदवी ने बताया कि कई इलाकों से चांद देखे जाने की खबरें मिली हैं, जिनकी जांच के बाद ऐलान किया गया।
आज रात से शुरू होगी तरावीह की नमाज
रमजान का चांद नजर आते ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है। आज रात से ही तरावीह, जो कि रमजान की एक विशेष नमाज है, का सिलसिला शुरू हो जाएगा। इस दौरान कुरान का पाठ किया जाता है। रमजान के पूरे महीने मुसलमान रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत में ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारते हैं। पांच वक्त की नमाज के साथ तरावीह का भी खास एहतिमाम किया जाता है।
क्या हैं सहरी और इफ्तार
रमजान के महीने में दो शब्द सबसे ज्यादा सुने जाते हैं — सहरी और इफ्तार। सहरी उस भोजन को कहते हैं जो रोजेदार सूर्योदय से पहले (फज्र की अजान से पहले) करते हैं। सहरी के बाद से रोजा शुरू हो जाता है। वहीं, दिन भर बिना कुछ खाए-पिए रहने के बाद सूर्यास्त के समय जब रोजा खोला जाता है, तो उसे इफ्तार कहते हैं। लोग अक्सर अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर इफ्तार करते हैं।
चांद पर आधारित है इस्लामिक कैलेंडर
इस्लामिक कैलेंडर चांद के चक्र पर आधारित होता है, इसीलिए हर साल रमजान की तारीख ग्रेगोरियन कैलेंडर के हिसाब से लगभग 10-11 दिन पहले आ जाती है। इस्लामिक कैलेंडर का नौवां महीना रमजान है। माना जाता है कि 622 ईस्वी में इसी महीने में पवित्र कुरान का अवतरण हुआ था। 30 दिनों के रोजे के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है, जिसे मीठी ईद भी कहते हैं।






