विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कर्नाटक की राजनीति, सुप्रीम कोर्ट की एसआईआर प्रक्रिया पर आए फैसले और इंडिया गठबंधन के नेतृत्व को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। दरअसल उन्होंने विपक्षी खेमे को आड़े हाथों लेते हुए विभिन्न मुद्दों पर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी का पक्ष मजबूती से रखा। अठावले ने अपने बयानों में विपक्ष के विभिन्न दावों और आंतरिक मतभेदों पर भी प्रकाश डाला।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर प्रक्रिया को संवैधानिक अधिकार करार दिए जाने के बाद से भाजपा लगातार विपक्ष पर हमलावर रही है। इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रामदास अठावले ने कहा कि विपक्ष किसी भी मुद्दे पर सरकार या चुनाव आयोग को निशाना बना सकता है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग को यह स्पष्ट अधिकार प्रदान किया है कि वह मतदाता सूची को स्वच्छ, पारदर्शी और सटीक बनाए रखने के लिए आवश्यक एवं प्रभावी कदम उठाए। अठावले ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची में किसी भी व्यक्ति का नाम अनावश्यक रूप से दो या तीन बार दोहराया नहीं जाना चाहिए, और इसी तरह मृत व्यक्तियों के नाम भी सूची से अनिवार्य रूप से हटाए जाने चाहिए ताकि चुनावों की निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने दावा किया कि इन सभी महत्वपूर्ण पहलुओं और तकनीकी बारीकियों की गहन समीक्षा करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग द्वारा अपनाई जा रही इस प्रक्रिया को पूरी तरह से सही ठहराया है। यह फैसला चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।
इंडिया गठबंधन में नेतृत्व के सवाल पर क्या बोले रामदास अठावले?
वहीं इंडिया गठबंधन में नेतृत्व के सवाल पर भी रामदास अठावले ने अपनी राय रखी। दरअसल कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को गठबंधन का सबसे बड़ा नेता बताए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपने-अपने नेताओं के नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात करते रहे हैं, जो उनकी आंतरिक राजनीति का हिस्सा है। केंद्रीय मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) यह दावा करेगी कि आगामी चुनाव ममता बनर्जी के नेतृत्व में लड़ा जाएगा, जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार की पार्टी अपने स्वयं के नेतृत्व का दावा करेगी। अठावले ने जोर देकर कहा कि इंडिया गठबंधन किसके नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा, यह उनका स्वयं का आंतरिक फैसला होगा और इस पर भाजपा या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि भाजपा और एनडीए अपनी एकजुटता और नेतृत्व के साथ पूरी तरह से तैयार हैं।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे को लेकर भी दिया बयान
दरअसल कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे को लेकर भी रामदास अठावले ने अपनी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पूर्व में जनता दल को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा था और उसके बाद उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री बनने का अवसर कई वर्षों तक प्राप्त हुआ। हालांकि, अठावले ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं की यह मांग लगातार बनी रही कि डीके शिवकुमार के नाम पर भी मुख्यमंत्री पद के लिए गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, जो पार्टी की आंतरिक खींचतान को दर्शाता है।






