पश्चिम बंगाल की राजनीति में उठापटक का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका उस समय लगा जब राज्यसभा के पूर्व सांसद डॉ. शांतनु सेन ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पद से इस्तीफा दे दिया है। गुरुवार को सामने आए इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह को एक बार फिर सतह पर ला दिया है, जहां एक के बाद एक नेता शीर्ष नेतृत्व के फैसलों और कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शांतनु सेन ने पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी को संबोधित अपने इस्तीफ़े में बेहद तीखे शब्दों का प्रयोग करते हुए अपनी असहजता और असहमति व्यक्त की है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
अपने इस्तीफ़े में डॉ. शांतनु सेन ने स्पष्ट रूप से लिखा है कि, “भले ही कई मुश्किल मौकों पर मैं उनके विचारों से सहमत नहीं था, फिर भी मैंने मीडिया में कई विवादित मुद्दों पर पार्टी के लिए खुलकर लड़ाई लड़ी है, जिसके लिए आम लोगों ने अक्सर मेरी तारीफ़ की है।” उन्होंने आगे कहा कि, “मौजूदा हालात में जब बंगाल की जनता ने आरजी कर केस और ‘कैश फॉर जॉब’ भ्रष्टाचार जैसे कई अनैतिक कामों और भ्रष्टाचार की वजह से हमें नकार दिया है, तो मेरा मन अब एक प्रवक्ता के तौर पर किसी भी तरह से उनका समर्थन करने को तैयार नहीं है।” डॉ. सेन ने जनता के फ़ैसले को सर्वोच्च बताते हुए कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए, वह तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय प्रवक्ता के पद से इस्तीफ़ा देना चाहते हैं और उन्होंने ममता बनर्जी से अपने इस्तीफ़े को स्वीकार करने और उसका सम्मान करने का अनुरोध भी किया है। यह बयान पार्टी के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर पार्टी की छवि और उसके कथित भ्रष्टाचार पर सवाल उठाता है।
बुधवार को काकोली घोष दस्तीदार ने भी छोड़ी TMC
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद से ही अंदरूनी बगावत का सामना कर रही है, जहां पार्टी राज्य की 294 सीटों में से सिर्फ़ 80 सीटें ही जीत पाई थी। इस हार के बाद से ही कई नेताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के ख़िलाफ़ खुलकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करनी शुरू कर दी है, और इसी कड़ी में डॉ. शांतनु सेन के इस्तीफे से पहले काकोली घोष दस्तीदार ने भी कल पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, जिससे पार्टी पर दबाव और भी बढ़ गया है। काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे ने भी पार्टी के भीतर की दरार को और गहरा किया है, क्योंकि वह भी एक महत्वपूर्ण नेता रही हैं।
अभी हाल में ही बारासात लोकसभा सीट से सांसद दस्तीदार ने कल्याणी में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की एक समीक्षा बैठक में भी हिस्सा लिया था, जिससे तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व और भी ज़्यादा नाराज़ हो गया था। उनके इस कदम को पार्टी विरोधी गतिविधि के रूप में देखा जा रहा था और इससे पहले ही पार्टी के भीतर उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। गुरुवार को उन्होंने तृणमूल कांग्रेस नेता कल्याण बनर्जी, जो श्रीरामपुर सीट से सांसद हैं, पर लोकसभा के भीतर उनके साथ ‘गाली-गलौज’ करने का भी गंभीर आरोप लगाया और उनके ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह आरोप पार्टी के भीतर की असामंजस्यता को और उजागर करता है। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने दस्तीदार के आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कल्याण बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से ख़ारिज करते हुए उन्हें ‘राजनीति से प्रेरित’ बताया है। कल्याण बनर्जी ने अपने बचाव में कहा कि जहां तक लगाए जा रहे आरोपों की बात है, तो सवाल यह है कि किसने, क्या और कब कहा, असल समस्या उनकी नीयत में है। इस तरह के लगातार इस्तीफे और आरोप-प्रत्यारोप पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं और आने वाले समय में इनकी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भी गहरी हो सकती हैं।






