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विनेश फोगाट के चयन ट्रॉयल को रोकने के लिए WFI ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

Written by:Ankita Chourdia
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प्रतिष्ठित पहलवान विनेश फोगाट के एशियाई खेल चयन ट्रायल में हिस्सेदारी को लेकर भारतीय कुश्ती महासंघ ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिससे यह मामला एक नए मोड़ पर आ गया है।
विनेश फोगाट के चयन ट्रॉयल को रोकने के लिए WFI ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

भारतीय कुश्ती के गलियारों में पहलवान विनेश फोगाट से जुड़ा एक और कानूनी दांवपेंच अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है, जिसने खेल जगत में हलचल मचा दी है। महिला पहलवान विनेश फोगाट को एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है, जिससे यह प्रतिष्ठित मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न केवल विनेश के करियर बल्कि देश की कुश्ती नीति के भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है।

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की विशेष बेंच द्वारा की जाएगी, जिससे उम्मीद है कि इस कानूनी उलझन पर जल्द ही कोई स्पष्टता सामने आएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की खंडपीठ डब्ल्यूएफआई की याचिका पर गहन सुनवाई करेगी। महासंघ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट को आगामी चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति प्रदान की गई थी, जिसके बाद से इस मुद्दे पर लगातार बहस जारी है।

दिल्ली हाईकोर्ट से विनेश फोगाट को राहत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने 22 मई के आदेश में विनेश फोगाट को बड़ी राहत दी थी, यह मानते हुए कि भारतीय कुश्ती महासंघ की चयन नीति एक्सक्लूजनरी यानी भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है। उच्च न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया था कि इस नीति में विनेश फोगाट जैसी प्रतिष्ठित और अनुभवी खिलाड़ी के लिए कोई विशेष विवेकाधिकार नहीं रखा गया है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि विनेश फोगाट मातृत्व अवकाश के बाद कुश्ती के अखाड़े में वापसी कर रही हैं और उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करने का एक उचित मौका मिलना चाहिए, जिससे उनका मनोबल बना रहे और वे देश के लिए फिर से पदक जीत सकें।

दिल्ली उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने अपने विस्तृत आदेश में यह भी निर्देश दिया था कि 30 और 31 मई 2026 को होने वाले चयन ट्रायल में विनेश फोगाट को निर्बाध रूप से भाग लेने दिया जाए। इसके साथ ही, पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इन सभी ट्रायल की संपूर्ण वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाए। इतना ही नहीं, भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और भारतीय ओलंपिक संघ (आओए) के स्वतंत्र पर्यवेक्षक भी इस पूरी प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहें, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात की गुंजाइश न रहे और सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिल सकें।

WFI ने विनेश को किया था अयोग्य घोषित

गौरतलब है कि इससे पहले भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट को 26 जून 2026 तक घरेलू टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था, जिसने खेल जगत में काफी विवाद पैदा किया था। महासंघ का तर्क था कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले किसी भी खिलाड़ी को यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के एंटी-डोपिंग नियमों के तहत कम से कम छह महीने पहले नोटिस देना अनिवार्य होता है। डब्ल्यूएफआई के मुताबिक, विनेश फोगाट ने यह अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी नहीं की थी, जिसके कारण वे घरेलू प्रतियोगिताओं में खेलने की पात्र नहीं थीं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस जटिल कानूनी और खेल संबंधी विवाद पर क्या निर्णय देता है, और क्या विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के लिए अपनी दावेदारी पेश करने का मौका मिल पाता है। यह फैसला भारतीय कुश्ती के भविष्य और खिलाड़ियों के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करेगा।

Ankita Chourdia
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