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‘मुसलमानों पर पिछले दरवाजे से हिंदू कानून थोपने की कोशिश की जा रही’, असम में UCC बिल पास होने पर असदुद्दीन ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

Written by:Ankita Chourdia
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असम विधानसभा ने यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित कर दिया गया है, जिस पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस को घेरा है। वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने इसे हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया है।
‘मुसलमानों पर पिछले दरवाजे से हिंदू कानून थोपने की कोशिश की जा रही’, असम में UCC बिल पास होने पर असदुद्दीन ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

समान नागरिक संहिता (UCC) पर देश में चल रही राजनीतिक बहस के बीच असम ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। दरअसल विधानसभा ने बुधवार को यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पारित कर दिया, जिसके साथ ही असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद राज्य स्तर पर UCC लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने वाला देश का तीसरा और पूर्वोत्तर का पहला राज्य बन गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में समान नागरिक संहिता को लेकर तीखी बयानबाजी और वैचारिक युद्ध छिड़ा हुआ है।

वहीं इस कानून का मुख्य उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों से जुड़े व्यक्तिगत कानूनों को सभी समुदायों के लिए एक समान बनाना है। हालांकि, इस विधेयक में अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है, जो एक महत्वपूर्ण पहलू है। बिल के प्रमुख प्रावधानों पर गौर करें तो इसमें बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा, विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा लिव-इन संबंधों के पंजीकरण को भी जरूरी बनाया गया है। बेटियों को संपत्ति में समान अधिकार देने का प्रावधान भी इस बिल में शामिल है, जो लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है। पुरुषों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय की गई है, जिससे बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर लगाम कसने की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

वहीं असम विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर सीधा और तीखा हमला बोला। सरमा ने दावा किया कि 1925 में सबसे पहले कांग्रेस ने ही UCC की मांग उठाई थी और 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी इसका प्रबल समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस अपने ही इतिहास और आदर्शों से विमुख हो गई है। सरमा ने आरोप लगाया कि अब कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्ष पार्टी नहीं मानती और केवल “एक विशेष समुदाय” का प्रतिनिधित्व कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस UCC का विरोध संविधान या जनजातीय परंपराओं के आधार पर नहीं कर रही, बल्कि वह “कुरान और शरीयत” के नजरिए से इसका विरोध कर रही है। यह आरोप कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष छवि पर सीधा प्रहार करता है और राजनीतिक गलियारों में गरमागरम बहस छेड़ गया है।

असदुद्दीन ओवैसी ने दिया बड़ा बयान

वहीं दूसरी ओर, एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने असम विधानसभा में पास हुए UCC बिल को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह दरअसल मुसलमानों पर “पिछले दरवाजे से हिंदू कानून थोपने” की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराधिकार, संपत्ति बंटवारे और तलाक जैसे मामलों में हिंदू सिद्धांत लागू किए जा रहे हैं, जबकि इसे “समान कानून” का नाम दिया जा रहा है। ओवैसी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए कहा कि इस बिल के माध्यम से केवल हिंदू संस्कृति की रक्षा की जा रही है, जबकि मुसलमानों को इन नियमों का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका यह बयान बिल के पीछे के इरादों पर सवाल उठाता है और इसे एक धार्मिक भेदभाव का प्रयास बताता है। इस प्रकार, असम का यह कदम एक ओर जहां सरकार की ओर से सामाजिक सुधार का प्रयास है, वहीं दूसरी ओर इसने देश की राजनीति में एक नई वैचारिक लड़ाई को जन्म दे दिया है।

Ankita Chourdia
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