रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित तीन सहकारी बैंकों पर जुर्माना लगाया है। यह कदम बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 के विभिन्न प्रावधानों के तहत उठाया है। किसी ने केवाईसी और लोन से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है। इस कार्रवाई की जानकारी आरबीआई ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट http://www.rbi.org.in पर दी है।
आरबीआई ने गुजरात के महिसागर जिले में स्थित द लुनावदा पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। महाराष्ट्र के पुणे में स्थित श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2 लाख रुपये की पेनल्टी लगाई है। राजस्थान में द जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड पर 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।
क्या है वजह?
द जालोर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने खातों के जोखिम वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा करने की एक प्रणाली स्थापित नहीं की। इसके अलावा निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने ग्राहकों के केवाईसी का समय-समय पर अपडेशन भी करने में विफल रहा।
द लुनावदा पीपल्स को-ऑपरेटिव बैंक ने ऐसे लोन को स्वीकृत किया, जिसमें निदेशकों के रिश्तेदार गारंटर के रूप में खड़े थे। श्री लक्ष्मी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ने खातों के जोखिम वर्गीकरण की समय-समय पर समीक्षा नहीं कर पाया। जिसकी अवधिकता 6 महीने में कम से कम एक बार होना चाहिए। ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड को सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड रजिस्ट्री पर भी अपलोड करने में विफल रहा। इसके अलावा ग्राहकों को सूचित किए बिना न्यूनतम शेष राशि बनाए न रखने पर दंडात्मक शुल्क लगाए। उन खातों की वार्षिक समीक्षा नहीं कि जिनमें 1 वर्ष से अधिक समय से ग्राहक द्वारा कोई लेनदेन नहीं किया गया है।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा। सेंट्रल बैंक ने कहा, “यह कार्रवाई विनियामक खामियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य ग्राहकों और बैंकों के बीच हो रहे बैंकों के बीच हो रहे लेनदेन या एग्रीमेंट की वैधता पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। न ही भविष्य में होने वाली किसी अन्य कार्रवाई पर भी इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।”






