नई दिल्ली: ईरान में पिछले कुछ समय से बने हुए तनावपूर्ण माहौल के बीच केंद्र सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि सरकार हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और घबराने की कोई बात नहीं है।
उन्होंने सदन को सूचित किया कि तेहरान में भारतीय दूतावास वहां मौजूद लगभग 9,000 से 10,000 भारतीय नागरिकों और छात्रों के साथ लगातार संपर्क में है। इन सभी को समय-समय पर जरूरी सलाह और निर्देश दिए जा रहे हैं। विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान का हवाई क्षेत्र पूरी तरह से खुला है और भारत के लिए नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों को फंसा हुआ नहीं माना जा सकता।
सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी और वर्तमान स्थिति
सरकार ने इस साल 5 और 14 जनवरी, 2026 को दो ट्रैवल एडवाइजरी जारी की थीं। इन एडवाइजरी के माध्यम से भारतीयों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी। साथ ही, जो नागरिक पहले से ईरान में मौजूद हैं, उन्हें सतर्क रहने और वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए लौटने पर विचार करने को कहा गया है।
विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि चूंकि नियमित उड़ान सेवाएं जारी हैं, इसलिए किसी विशेष निकासी अभियान की योजना नहीं बनाई गई है। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी 2026 को उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर बात कर हालात का जायजा लिया था। भारत इस पूरे मामले पर विभिन्न पक्षों से संपर्क में है।
ईरान में कितने भारतीय और पिछला निकासी अभियान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में ईरान के 16 अलग-अलग प्रांतों में करीब 9,000 से 10,000 भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें छात्र, कामगार, तीर्थयात्री, पर्यटक, कारोबारी और समुद्री क्षेत्र से जुड़े पेशेवर शामिल हैं।
एस. जयशंकर ने यह भी याद दिलाया कि ईरान से आखिरी बार बड़े पैमाने पर निकासी अभियान जून 2025 में चलाया गया था। ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत ईरान और इजराइल के बीच तनाव के दौरान 3,597 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाया गया था। सरकार ने साफ किया है कि अगर भविष्य में हालात बिगड़ते हैं तो स्थिति की समीक्षा कर आगे का फैसला लिया जाएगा।





