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मुख्यमंत्री साय ने पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण को दिया 80 करोड़ का बजट, IIT भिलाई के लिए 40 कंपनियों से MoU साइन

Written by:Shyam Dwivedi
Published:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में दुर्ग में हुई छत्तीसगढ़ पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण की बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 80 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव रखा गया। इस दौरान विकास कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ आईआईटी भिलाई के लिए 40 कंपनियों के साथ महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर भी हस्ताक्षर किए गए।
मुख्यमंत्री साय ने पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण को दिया 80 करोड़ का बजट, IIT भिलाई के लिए 40 कंपनियों से MoU साइन

दुर्ग: छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास को गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बड़ी घोषणा की है। दुर्ग जिले के पीडब्ल्यूडी सभागार में आज आयोजित राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण की महत्वपूर्ण बैठक में उन्होंने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 80 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान प्रस्तावित किया। इस अहम फैसले के साथ ही मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के एकमात्र भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के लिए एक आईआईटी पार्क के निर्माण हेतु 40 विभिन्न कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए।

यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पिछले दो महीनों में दो बार स्थगित होने के बाद आखिरकार यह संपन्न हुई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि विकास के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और यह बजट प्राधिकरण के तहत आने वाले 35 विधानसभा क्षेत्रों में विकास कार्यों को तेजी देगा।

आईआईटी भिलाई को मिलेगी नई उड़ान

बैठक का एक अन्य बड़ा आकर्षण आईआईटी भिलाई के भविष्य से जुड़ा फैसला रहा। मुख्यमंत्री साय ने 40 कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिससे संस्थान में एक अत्याधुनिक आईआईटी पार्क की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। इस कदम से भविष्य में आईआईटी के विद्यार्थियों को इंटर्नशिप, शोध और रोजगार के बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। यह प्रदेश में तकनीकी शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

बैठक में दिग्गजों का जमावड़ा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन और विपक्ष के कई बड़े चेहरे मौजूद रहे। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल, लक्ष्मी रजवाड़े, गुरु सुखवंत साहेब, टंकराम वर्मा, और गजेंद्र यादव शामिल हुए। वहीं, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की उपस्थिति ने भी सबका ध्यान खींचा।

इनके अलावा विधायक, राज्य शासन के सचिव, जिला पंचायत अध्यक्ष और प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाले 18 जिलों के कलेक्टर भी बैठक का हिस्सा बने। बैठक के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से लागू करने के सुझावों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह प्राधिकरण राज्य के पांच प्राधिकरणों में से एक है, जो एक बड़े क्षेत्र के विकास का जिम्मा संभालता है।