जापान यात्रा के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन पहुंचे हैं। चीन में प्रधानमंत्री SCO शिखर सम्मेलन 2025 में भाग लेंगे। पिछले 7 सालों में प्रधानमंत्री की यह पहली चीनी यात्रा होगी। यह यात्रा कई महीनों में महत्वपूर्ण रहेगी। भारत-चीन के रिश्तों के साथ-साथ यह दुनिया भर के कई देशों पर भी प्रभाव डालेगी। दरअसल, एक तरफ अमेरिका से बिगड़ते हुए रिश्ते और दूसरी ओर चीन की यात्रा, अमेरिका और भारत के रिश्तों के लिए भी बड़ा मुद्दा है।
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर एक्स्ट्रा टैरिफ का ऐलान किया था। इसका कारण रूस से तेल और हथियार खरीद को बताया गया था। चीन के साथ होने वाले इस SCO शिखर सम्मेलन में रूस भी शामिल रहेगा। अमेरिका की नजर भी इस शिखर सम्मेलन पर रहेगी।
क्यों मानी जा रही यह यात्रा अहम?
SCO शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है। इस निमंत्रण के साथ ही भारत और चीन के संबंध भी कुछ सुधरे हुए नजर आ रहे हैं। पहले 2020 में सीमा पर चीन और भारत के बीच झड़पें हुई थीं। ऐसे में इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न सिर्फ चीन के साथ बैठक करेंगे और रिश्तों पर बात करेंगे, बल्कि अन्य कई देशों के नेताओं से भी मिलेंगे। इसके अलावा, यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि एक ओर अमेरिका, यूक्रेन युद्ध के बीच रूस से तेल खरीदने पर भारत की आलोचना कर रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर कुल 50% डायरेक्ट टैरिफ लगाया है।
पीएम मोदी यात्रा पर नज़र डालें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी यात्रा पर नज़र डालें तो 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से इस सम्मेलन का हिस्सा रहा है। वहीं 31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वागत भोज में शामिल होंगे, जबकि मुख्य शिखर सम्मेलन 1 सितंबर, सोमवार को आयोजित किया जाएगा। भारत और रूस के बीच इस दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर बात हो सकती है, जबकि भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए संघर्ष को लेकर भी रूस और चीन के साथ वार्तालाप की जा सकती है।





