नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सोमवार को विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस गतिरोध को समाप्त करने के प्रयास में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी सहित कई विपक्षी नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की।
करीब आधे घंटे तक चली इस बैठक में विपक्षी नेताओं ने स्पीकर के सामने अपनी बात रखी और कई अहम मुद्दों पर सदन में तत्काल चर्चा की मांग की। हालांकि, इस बैठक में गतिरोध का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया। स्पीकर बिरला ने विपक्ष की मांगों पर तत्काल सहमति नहीं दी और कहा कि वह पहले इस पर सत्ता पक्ष से बातचीत करेंगे, जिसके बाद ही कोई निर्णय लेंगे।
किन मुद्दों पर अड़ा है विपक्ष?
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी नेताओं ने स्पीकर ओम बिरला के सामने तीन प्रमुख मुद्दे उठाए। विपक्ष चाहता है कि सदन में इन विषयों पर प्राथमिकता के साथ चर्चा हो:
- सांसदों का निलंबन: विपक्ष अपने सांसदों के निलंबन के मुद्दे को लगातार उठा रहा है और इसे अलोकतांत्रिक बता रहा है।
- निशिकांत दुबे के आरोप: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा विपक्ष पर लगाए गए एकतरफा आरोपों पर भी विपक्ष चर्चा चाहता है।
- महिला सांसदों का पत्र: पांच महिला सांसदों द्वारा लिखे गए एक पत्र के विषय पर भी सदन में बात रखने की मांग की गई है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इन गंभीर मुद्दों पर बहस से बच रही है और जानबूझकर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। विपक्ष का कहना है कि सत्ता पक्ष को धैर्य के साथ इन सभी विषयों पर चर्चा करनी चाहिए।
‘गद्दार’ वाले बयान से गरमाया है माहौल
संसद में मौजूदा संग्राम की एक बड़ी वजह कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बीजेपी सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को कथित तौर पर ‘गद्दार’ कहना है। इस बयान के बाद से ही राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद संसद में इस मुद्दे को उठाते हुए इसे पूरे सिख समुदाय का अपमान बताया था। इसके बाद सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने इस मामले पर राहुल गांधी को घेरा, जिसके जवाब में कांग्रेस ने भी बीजेपी और बिट्टू पर पलटवार किया।
विपक्ष की आगे की रणनीति
बजट सत्र के पहले चरण का समापन 13 फरवरी को होना है। इससे पहले विपक्ष सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। इसी सिलसिले में राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में विपक्षी नेताओं की एक बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। विपक्ष की कोशिश है कि सत्र के समापन से पहले जरूरी मुद्दों पर चर्चा कराकर सरकार पर दबाव बनाया जाए।





