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क्या पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल और भाजपा के बीच होगा गठबंधन? सुखबीर सिंह बादल ने दे दिया बड़ा बयान, जानें क्या कहा

Written by:Ankita Chourdia
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पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच गठबंधन की अटकलें तेज थीं, जिस पर अब सुखबीर बादल ने 2027 चुनावों के लिए अपना रुख साफ कर दिया है।

पंजाब की सियासत में पिछले कई दिनों से शिरोमणि अकाali दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन की ख़बरें सुर्खियों में बनी हुई थीं, लेकिन अब इन अटकलों पर शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने गुरुवार, 11 जून को 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के साथ किसी भी संभावित गठबंधन की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चल रही तमाम चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।

सुखबीर बादल ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि उनका पूरा ध्यान अपनी पार्टी अकाली दल को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर केंद्रित है और वे इसी दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस समय ‘अगर-मगर’ वाली बातों का जवाब देने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि उनकी प्राथमिकता पार्टी संगठन को सशक्त बनाना और जनता के बीच अपनी पैठ फिर से मजबूत करना है। बादल का यह बयान ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आया है जब पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की तलाश लगातार जारी है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भारतीय जनता पार्टी के कई शीर्ष नेता पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का संकेत पहले ही दे चुके हैं। पिछले कुछ समय से यह अटकलें जोरों पर थीं कि सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व वाली अकाली दल और भाजपा के बीच गठबंधन को लेकर गहन बातचीत चल रही है, जिसके जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि, बादल के इस बयान ने अब इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है और दोनों पार्टियों के अलग-अलग रास्ते पर चलने की पुष्टि कर दी है।

अकाली दल को मजबूत करना ही प्राथमिकता: सुखबीर बादल

भाजपा के साथ संभावित गठबंधन के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए सुखबीर बादल ने अपनी बात दोहराई और कहा कि उनका एकमात्र मकसद अकाली दल को मजबूत करना है और वे पूरी शिद्दत से इसी लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिलहाल भविष्य की काल्पनिक संभावनाओं पर बात करने का कोई फायदा नहीं है, क्योंकि उनका वर्तमान फोकस पार्टी के भीतर सुधार और विस्तार पर है। कई मौकों पर भाजपा नेताओं ने भी अगले साल होने वाले चुनावों में अकेले लड़ने का अपना इरादा स्पष्ट रूप से जाहिर किया है, जो दोनों दलों के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है।

क्या पंजाब में भाजपा अकेले लड़ेगी चुनाव?

बुधवार को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि पार्टी 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों में राज्य की सभी 117 सीटों पर अकेले दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। यह भाजपा की पंजाब में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने और अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, खासकर तब जब उसने पिछले चुनावों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया था।

2020 में अकाली दल ने एनडीए से तोड़ा नाता

गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल ने सितंबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अपना नाता तोड़ लिया था। इन कानूनों को बाद में केंद्र सरकार ने किसानों के भारी विरोध के बाद वापस ले लिया था, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अकाली दल और भाजपा के बीच फिर से गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई थी।

एनडीए से अलग होने के बाद 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अकेले चुनाव लड़ा था और राज्य में दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, शिरोमणि अकाली दल का चुनावी प्रदर्शन इन चुनावों में अब तक का सबसे खराब रहा था, जिसमें उसे केवल तीन सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। इस खराब प्रदर्शन के बाद अकाली दल पर अपनी राजनीतिक जमीन फिर से हासिल करने का दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल ने संगठन को मजबूत करने और अकेले दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर जोर दिया है।

Ankita Chourdia
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