राम मंदिर में दान – चढ़ावा चोरी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, याचिकाकर्ता ने मामले की तुरंत सुनवाई की मांग की थी जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया , कोर्ट ने पूछा आखिर इतनी जल्दी क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह मामला अदालत के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद खुलने पर लिस्ट किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट में दो एडवोकेट अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने ये जनहित याचिका लगाई, जिसमें मांग की गई कि राम मंदिर निर्माण के लिए इकट्ठा किये गए दान के पैसे के कथित दुरुपयोग की जाँच सीबीआई की अगुवाई में गठित एसआईटी करे, याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जाँच पर भरोसा नहीं किया जा सकता, याचिका में अहम् सबूतों को भी ठीक से सुरक्षित रखें जाने पर संदेह जताया।
याचिका सुनने से इंकार पूछा- बाद में सुनेंगे तो क्या आसमान टूट पड़ेगा
याचिका सामने आने पर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच ने तुरंत सुनवाई की याचिका को खारिज कर दिया, जज ने नाराजगी जताते हुये सवाल किया कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों है? यदि गर्मी की छुट्टियों के बाद जब अदालत खुलेगी और कोर्ट का नियमित कामकाज शुरू होगा और तब सुनवाई होगी तब तक कोई आसमान नहीं टूट पड़ेगा, बेंच ने याचिका पर अदालत खुलने के बाद 12 से 17 जुलाई के सप्ताह में याचिका को लिस्ट करने के निर्देश दिए।
एसआईटी जाँच, पुलिस एक्शन पर उठ रहे हैं सवाल
उल्लेखनीय है कि 13 जून को राम मंदिर दान-चढ़ावा चोरी के आरोपों की जानकारी मीडिया में आने के बाद उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने एसआईटी गठित कर मामले की जाँच के निर्देश दिए , एसआईटी ने तीन में शुरूआती जाँच कर 23 जून को सरकार को सौंप दी उसके दो दिन बाद ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर अयोध्या पुलिस ने मंदिर से जुड़े 8 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, सरकार की इस कार्रवाई पर विपक्ष सवाल खड़े कर रहा है बिना एफआईआर किये जाँच कर और उसकी रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने पर लोग सवाल कर रहे है और बड़े आरोपियों को बचाकर छोटों की फंसाने की साजिश कह रहे हैं।






