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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया पर ममता सरकार को लगाई फटकार, पूछा- न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत कैसे हुई

Written by:Ankita Chourdia
Published:
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने ममता सरकार के प्रति सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने राज्य सरकार की एक अर्जी पर गहरी नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी कि न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई अहम निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल SIR प्रक्रिया पर ममता सरकार को लगाई फटकार, पूछा- न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत कैसे हुई

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में SIR (Special Investigation and Registration) प्रक्रिया में हो रही प्रगति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ममता बनर्जी सरकार को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राज्य सरकार द्वारा दायर एक आवेदन पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक अधिकारियों की क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मामला तब गरमाया जब पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि न्यायिक अधिकारियों ने अब तक लगभग 7 लाख दावों का निपटारा कर दिया है। उन्होंने बताया कि पहले 63 लाख दावे लंबित थे, जिनमें से अब करीब 57 लाख मामले बचे हैं।

CJI ने क्यों जताई नाराजगी?

इस जानकारी पर CJI सूर्यकांत ने सख्त लहजे में टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “हमें पता था कि जैसे ही न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा, आप लोग पीछे हट जाएंगे।” CJI ने आगे बताया कि उन्हें हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जानकारी मिली है कि 10 लाख मामलों का निपटारा हो चुका है।

राज्य सरकार के आवेदन को ‘समय से पहले’ दायर किया गया बताते हुए CJI ने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार को न्यायिक अधिकारियों पर भरोसा नहीं है।

“ऐसे आवेदन दाखिल करने की हिम्मत कैसे हुई? कोई भी न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाने की हिम्मत न करे, मैं इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा।”- CJI सूर्यकांत

इस पर वरिष्ठ वकील गुरुस्वामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का इरादा न्यायिक अधिकारियों पर सवाल उठाना नहीं था।

अदालत ने जारी किए कई अहम निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के जारी रखने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

अदालत ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि इस प्रक्रिया को बाधित करने वाला कोई भी अनिवार्य कदम हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के बिना न उठाया जाए। इसके अलावा, पोर्टल में आ रही तकनीकी दिक्कतों को तत्काल दूर करने और भविष्य में ऐसी समस्याएं न आएं, यह सुनिश्चित करने को कहा गया है। अधिकारियों के काम में रुकावट न हो, इसके लिए जरूरत के हिसाब से तुरंत नए लॉग-इन आईडी बनाने का भी आदेश दिया गया है।

कोर्ट ने अपील की व्यवस्था को भी स्पष्ट किया। न्यायिक अधिकारी द्वारा दिए गए फैसले के खिलाफ किसी भी प्रशासनिक निकाय के समक्ष अपील नहीं की जा सकेगी। इसके लिए हाईकोर्ट के पूर्व जजों का एक अपीलीय न्यायाधिकरण गठित करने का निर्देश दिया गया है।

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