पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी, एनआईए को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि स्थानीय पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, इसलिए मामले के सभी दस्तावेज एनआईए को तुरंत सौंपे जाएं।
शीर्ष अदालत ने अपने विशेष अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए मालदा घटना से जुड़े सभी मामलों की जांच एनआईए को देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में पश्चिम बंगाल पुलिस ने जिन 26 लोगों को गिरफ्तार किया था, उनसे अब एनआईए ही पूछताछ करेगी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव लगाई जमकर फटकार
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को जमकर फटकार लगाई। अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नारियाला ने कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन नहीं उठाया, जो कि एक बेहद गंभीर लापरवाही है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस मामले में मुख्य न्यायाधीश से तुरंत माफी मांगें। यह घटना 1 अप्रैल को हुई थी, जिस दिन न्यायिक अधिकारियों को घेरा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की नौकरशाही पर कड़ी टिप्पणी की
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की नौकरशाही पर भी कड़ी टिप्पणी की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि पश्चिम बंगाल प्रशासन की विश्वसनीयता कमजोर हो रही है। बेंच ने इस बात पर चिंता जताई कि राजनीति सचिवालय और सरकारी दफ्तरों में घुस रही है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि मालदा की घटना पूर्व नियोजित और प्रेरित थी, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेराव का सामना करना पड़ा।
कोर्ट ने मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला को सीधे तौर पर फटकार लगाते हुए कहा कि घटना वाले दिन, यानी 1 अप्रैल को, उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस लापरवाही के लिए माफी मांगने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मुख्य सचिव का यह रवैया जिला प्रशासन की विफलता को दर्शाता है।
इस फैसले के बाद अब मालदा न्यायिक अधिकारियों के घेराव मामले की पूरी जांच और पूछताछ एनआईए के हाथों में होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम राज्य प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा असर डालेगा, साथ ही न्यायिक स्वतंत्रता और अधिकारियों की सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण संदेश देगा। राज्य पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारियों पर भी अब एनआईए नए सिरे से जांच करेगी।