तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मंगलवार को अपनी महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ के विस्तार की घोषणा की, जिसके तहत अब लगभग 20 लाख स्कूली बच्चे इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। स्टालिन ने इसे राज्य के भविष्य में निवेश करार देते हुए कहा कि यह योजना बच्चों के पोषण, शिक्षा और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस योजना की सराहना की और इसे अपने राज्य में लागू करने की संभावना तलाशने की बात कही।
स्टालिन ने योजना की शुरुआत के पीछे की प्रेरणा साझा करते हुए बताया कि चेन्नई के एक स्कूल में बच्चों से बातचीत के दौरान उन्हें पता चला कि कई बच्चे नाश्ते में केवल चाय या हल्का भोजन करके स्कूल आते हैं। इसके बाद उन्होंने इस योजना को शुरू करने का फैसला किया। अब इस योजना के विस्तार से 2,420 सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में 3.6 लाख अतिरिक्त बच्चों को शामिल किया गया है। स्टालिन ने बताया कि इस योजना पर 600 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जो बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए निवेश है।
बच्चों को पौष्टिक नाश्ता
यह योजना न केवल बच्चों को पौष्टिक नाश्ता प्रदान करती है, बल्कि उनके स्वास्थ्य, स्कूल में उपस्थिति और शैक्षिक प्रदर्शन में भी सुधार ला रही है। स्टालिन ने कहा कि इस योजना के कारण बच्चों में कुपोषण कम हुआ है, स्कूलों में उत्साह बढ़ा है और सामाजिक कौशल में सुधार हुआ है। सर्वेक्षणों से पता चला है कि स्कूलों में उपस्थिति बढ़ी है, शैक्षिक कौशल में सुधार हुआ है और बीमारियों का प्रसार कम हुआ है।
पंजाब में लागू करने पर विचार
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस योजना को सराहते हुए कहा कि वह इसे पंजाब में लागू करने पर विचार करेंगे। तमिलनाडु की इस पहल ने न केवल देश के अन्य राज्यों, बल्कि कनाडा जैसे देशों का भी ध्यान आकर्षित किया है, जहां इसे लागू किया गया है। डीएमके के संगठन सचिव टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि यह योजना स्कूल छोड़ने की दर को कम करने और बच्चों को शिक्षा की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिसके कारण तमिलनाडु स्कूली छात्रों की संख्या और कम ड्रॉपआउट दर में अग्रणी है।






