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भारत के 3 ऐतिहासिक बजट: 1991 के आर्थिक सुधार, 2012 का टैक्स विवाद और 2019 की PM-किसान योजना

Written by:Rishabh Namdev
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भारत में हर साल पेश होने वाले बजट में कुछ ऐसे रहे हैं जिन्होंने देश की आर्थिक और राजनीतिक दिशा बदल दी। 1991 के बजट ने जहां उदारीकरण की नींव रखी, वहीं 2012 का बजट अपने टैक्स प्रस्तावों के कारण विवादित रहा। 2019 के बजट को किसानों और मध्यम वर्ग के लिए की गई घोषणाओं ने लोकप्रिय बना दिया।
भारत के 3 ऐतिहासिक बजट: 1991 के आर्थिक सुधार, 2012 का टैक्स विवाद और 2019 की PM-किसान योजना

भारत में केंद्रीय बजट को सरकार की आर्थिक नीतियों का आईना माना जाता है, लेकिन कुछ बजट ऐसे भी रहे जो सिर्फ सालाना लेखा-जोखा न रहकर इतिहास का हिस्सा बन गए। इन बजटों ने देश की अर्थव्यवस्था, बाजार और आम लोगों पर गहरा असर डाला। इनमें से तीन बजट अपनी अलग-अलग वजहों से आज भी याद किए जाते हैं—1991 का ऐतिहासिक, 2012 का विवादित और 2019 का लोकप्रिय बजट।

1991: जब एक बजट ने बदली देश की तकदीर

साल 1991 का बजट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक क्रांतिकारी मोड़ था। उस वक्त देश गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म होने की कगार पर था। ऐसे मुश्किल समय में पेश किए गए इस बजट ने भारत के लिए आर्थिक सुधारों के दरवाजे खोल दिए।

इस बजट के जरिए ‘लाइसेंस राज’ को खत्म करने की शुरुआत हुई, जिससे उद्योगों को अनावश्यक सरकारी नियंत्रण से मुक्ति मिली। निजी क्षेत्र को बढ़ावा दिया गया और विदेशी निवेश के लिए रास्ते खोले गए। इसी बजट ने भारत को एक बंद अर्थव्यवस्था से निकालकर वैश्विक बाजार से जोड़ा। आज की आधुनिक भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव इसी बजट ने रखी थी।

2012: एक फैसला और हिल गया निवेशकों का भरोसा

2012 का केंद्रीय बजट अपने एक विवादित प्रस्ताव के कारण सुर्खियों में रहा। उस समय देश आर्थिक सुस्ती का सामना कर रहा था और निवेश को बढ़ावा देना एक बड़ी चुनौती थी। इसी बीच सरकार ने बजट में रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स यानी पिछली तारीख से कर लगाने का प्रावधान पेश कर दिया।

इसके साथ ही टैक्स चोरी रोकने के लिए GAAR जैसे नियमों का प्रस्ताव भी लाया गया। इन फैसलों से विदेशी निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बन गया। उन्हें डर था कि इससे टैक्स व्यवस्था अस्थिर हो सकती है। इसका नतीजा यह हुआ कि शेयर बाजार में भारी गिरावट आई और विदेशी निवेश प्रभावित हुआ। चौतरफा आलोचना के बाद सरकार को इन नियमों में बदलाव करने पड़े, लेकिन यह बजट लंबे समय तक आर्थिक बहसों का केंद्र बना रहा।

2019: चुनावी साल और लोकलुभावन घोषणाएं

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेश किया गया 2019 का अंतरिम बजट देश के सबसे लोकप्रिय बजटों में से एक माना जाता है। इस बजट का सीधा फोकस किसान, मध्यम वर्ग और असंगठित क्षेत्र के कामगारों पर था।

इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना थी, जिसके तहत पहली बार किसानों को सीधे नकद सहायता देने की शुरुआत की गई। इसके अलावा, मध्यम वर्ग को राहत देते हुए आयकर छूट की सीमा बढ़ाई गई, जिससे करोड़ों वेतनभोगी लोगों को फायदा हुआ। इन फैसलों ने इस बजट को ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय बना दिया।

ये तीनों बजट तीन अलग-अलग दौर की कहानी कहते हैं। एक ने देश को संकट से निकालकर नई राह दिखाई, दूसरे ने नीतिगत फैसलों पर भरोसे की परीक्षा ली और तीसरे ने सीधे जनता से जुड़कर लोकप्रियता हासिल की।